Upgrade Jharkhand News. भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब से बेहद गंभीर स्तर के बीच बनी हुई है। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण का असर हमारी सेहत पर जितना दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक गहरा और लंबे समय तक रहने वाला है। हाल ही में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस द्वारा देशभर के 400 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों पर किए गए एक सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो बताते हैं कि प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए हम अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत से अधिक डॉक्टरों का मानना है कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (।फप्) 200 के पार चला जाता है, तो यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हो जाता है।
वहीं, चार में से लगभग तीन डॉक्टरों का कहना है कि खराब हवा की गुणवत्ता भविष्य में गंभीर और जानलेवा बीमारियों के जोखिम को लगातार बढ़ा रही है। दो-तिहाई से अधिक डॉक्टरों ने यह भी चिंता जताई कि मरीज लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से होने वाले नुकसान को गंभीरता से नहीं लेते। इस अध्ययन में एक और बड़ी चिंता आर्थिक पहलू को लेकर सामने आई है। अधिकांश डॉक्टरों का कहना है कि करीब 95 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जो प्रदूषण के कारण अचानक अस्पताल या आईसीयू में भर्ती होने के भारी खर्च के लिए मानसिक या आर्थिक रूप से तैयार नहीं होते। इलाज में देरी और लंबा उपचार न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि परिवार पर भारी आर्थिक बोझ भी डालता है।
इन निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया देते हुए टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के कंज्यूमर बिजनेस क्लेम्स प्रमुख राजगोपाल रुद्रराजू ने कहा कि वायु प्रदूषण अब कुछ दिनों की अस्थायी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, डॉक्टर से सलाह और भविष्य की सही योजना ही इस खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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