Jamshedpur (Nagendra) लंबे समय से जिस क्षण की प्रतीक्षा की जा रही थी, वह दिन अंततः आ ही गया जब प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. रमेश तिवानी जी का ब्रह्माकुमारीज परिवार द्वारा बिष्टुपुर स्थित केंद्र में हार्दिक स्वागत किया गया। ब्रह्माकुमारीज बिष्टुपुर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सैकड़ों भाई-बहनों ने भाग लिया और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
भोपाल से पधारे डॉ. रमेश तिवानी जी योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। वे योग विषय में पीएचडी, एम.फिल तथा एम.एससी की उच्च शैक्षणिक उपाधियाँ प्राप्त कर चुके हैं। इसके साथ ही वे भोपाल में अपने महाविद्यालय का सफलतापूर्वक संचालन भी कर रहे हैं। योग और प्राकृतिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित (नेशनल अवॉर्ड) भी किया जा चुका है। अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. तिवानी जी ने उपस्थित जनसमूह से प्रश्न किया— “क्या आप सभी स्वयं को पूर्ण रूप से फिट मानते हैं?” इस प्रश्न ने कुछ क्षणों के लिए सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने समझाया कि वास्तव में स्वस्थ वही है जो पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सके कि उसका शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ और संतुलित है।
डॉ. तिवानी जी ने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का मुख्य केंद्र हमारा पेट है। हम कई प्रकार के भोजन का सेवन तो करते हैं, परंतु शरीर से अपशिष्ट पदार्थों के सही निष्कासन पर उतना ध्यान नहीं देते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हम दिन में तीन बार भोजन करते हैं तो शरीर से अपशिष्ट का निष्कासन भी उतनी ही बार होना चाहिए। शरीर में लंबे समय तक जमा रहने वाला अपशिष्ट ही अनेक रोगों की जड़ बनता है। उन्होंने यह भी बताया कि भोजन तभी करना चाहिए जब वास्तविक भूख लगे। बिना भूख के बार-बार भोजन करना पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालता है और इससे शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगता है, जो आगे चलकर कई रोगों का कारण बन सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि जब शरीर से अपशिष्ट सही ढंग से बाहर नहीं निकलता और व्यक्ति को जोर लगाना पड़ता है, तो इससे पाइल्स (बवासीर), हर्निया, गैस, कब्ज और कई अन्य पाचन संबंधी रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को सही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. तिवानी जी ने यह भी बताया कि अच्छी और गहरी नींद पाचन और उत्सर्जन की प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि हमारी नींद संतुलित और पर्याप्त नहीं है तो शरीर की कई प्राकृतिक क्रियाएँ प्रभावित हो जाती हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. तिवानी जी ने बताया कि उनके जीवन को बदलने वाला और अनेक गंभीर रोगियों को नया जीवन देने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है “एनीमा (Enema)”। उन्होंने कहा कि यह प्रकृति का ऐसा वरदान है जिसमें अंतिम अवस्था के रोगियों को भी पुनर्जीवित करने की अद्भुत क्षमता होती है। उन्होंने अनेक रोगियों के स्वस्थ होने के प्रेरक अनुभव भी साझा किए।
डॉ. तिवानी जी ने यह भी बताया कि कल से प्रारंभ होने वाले तीन दिवसीय शिविर में वे प्राकृतिक आहार, शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया और प्रकृति आधारित जीवनशैली के गहरे रहस्यों को विस्तार से समझाएंगे, जिससे व्यक्ति अपने शरीर की मूल और स्वाभाविक स्वास्थ्य अवस्था को पुनः प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि कल से “तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा जागरूकता शिविर” का आयोजन होने जा रहा है, जिसका स्थान यूनिवर्सल पीस पैलेस, मरीन ड्राइव, सोनारी (जमशेदपुर) रहेगा। इस शिविर में बड़ी संख्या में लोग भाग लेकर प्राकृतिक चिकित्सा और प्राकृतिक आहार के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार के व्यावहारिक उपाय सीख सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से लोग स्वयं अपने डॉक्टर बनना सीखेंगे, प्रकृति के सबसे निकट मित्र बनेंगे और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारीज कोल्हान की निदेशक बहन अंजू जी ने डॉ. रमेश तिवानी जी का आभार व्यक्त किया। लगभग दो घंटे चले इस सत्र में उपस्थित लोगों ने प्राकृतिक आहार और जीवनशैली को अपनाने का संकल्प लिया। बहन अंजू जी ने जमशेदपुर वासियों से आह्वान किया कि वे इस शिविर में कम से कम एक या दो दिन अवश्य भाग लें और प्राकृतिक स्वास्थ्य के मार्ग को अपनाएँ। शिविर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर : 9006776676 पर संपर्क कर सकते हैं।





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