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Bhopal संस्कृत को समर्पित आयरलैंड के संस्कृत दूत पद्मश्री रटगर कोर्टेनहॉर्स्ट Padma Shri Rutger Kortenhorst, Ireland's Sanskrit ambassador dedicated to Sanskrit

 


Upgrade Jharkhand News. पद्मश्री रटगर कोर्टेनहॉर्स्ट आयरलैंड के डबलिन स्थित जॉन स्कॉटस सीनियर स्कूल में संस्कृत के प्रखर शिक्षक हैं, जिन्हें 2022 में भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी उपलब्धियाँ न केवल संस्कृत को पश्चिमी जगत में जीवंत बनाती हैं, बल्कि इस भाषा के शाश्वत महत्व को भी रेखांकित करती हैं, जो ज्ञान, संस्कृति और कल्याण का आधार है। 21 वर्ष की आयु में ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में पढ़ते हुए रटगर को डब्ल्यू. बी. यीट्स द्वारा अनुदित 'द टेन प्रिंसिपल उपनिषद्' तथा भारती कृष्ण तीर्थ की 'वैदिक गणित' ने संस्कृत की ओर आकर्षित किया। 2006-2007 में बैंगलोर के वेद विज्ञान गुरुकुलम में उन्होंने डॉ. रामचंद्र भट्ट के मार्गदर्शन में तैत्तिरीय उपनिषद्, व्याकरण, विवेकचूडामणि और बोलचाल की संस्कृत सीखी।


2008-2009 में उन्होंने पश्चिमी बच्चों के लिए नई शिक्षण पद्धति विकसित की तथा पॉन्डिचेरी के श्री अरविंद आश्रम में डॉ. नरेंद्र से सरल संस्कृत प्रचार की शिक्षा ग्रहण की।  आयरलैंड में वाइस प्रिंसिपल पद त्यागकर उन्होंने पूर्णकालिक संस्कृत शिक्षण को अपनाया, जहाँ जॉन स्कॉटस स्कूल (1986 से संस्कृत अनिवार्य विषय) के छात्रों को इंटरैक्टिव तरीके से जटिल व्याकरण सिखाया। आयरिश बच्चों के लिए संस्कृत पुस्तकें प्रकाशित कीं तथा 2016 से 12-15 वर्ष के बच्चों के लिए आयुर्वेद-योग आधारित 'वेलबीइंग' कोर्स चलाया। उनका यूट्यूब चैनल संस्कृत कक्षाओं और उपनिषदीय मंत्रोच्चारण से भरा हुआ है, जो वैश्विक प्रचार का माध्यम बना।


2020 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद से विश्व संस्कृत पुरस्कार तथा 2022 में पद्मश्री प्राप्ति उनकी उपलब्धियों का प्रमाण है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 29 अगस्त 2021 के 'मन की बात' में उनका उल्लेख किया।      भारत-आयरलैंड सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने हेतु राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 28 मार्च 2022 को नई दिल्ली में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया। संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है,अपितु अद्वैत वेदांत, आयुर्वेद, योगसूत्र और भगवद्गीता का ज्ञानकोश है। उनके प्रयासों से आयरलैंड जैसे यूरोपीय देश में बच्चे संस्कृत बोलते-समझते हैं, जो सिद्ध करता है कि संस्कृत भाषा वैज्ञानिक संरचना है। उन्होंने प्रमाणित कर दिखाया है कि संस्कृत , बच्चों में मस्तिष्क विकास, एकाग्रता और नैतिक मूल्यों को पोषित करती है।


वैश्विक संदर्भ में संस्कृत, योग-आयुर्वेद के प्रसार से मानसिक कल्याण सुनिश्चित करती है। रटगर के वेलबीइंग कोर्स में यह स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर स्थापित कर वे सिद्ध करते हैं कि संस्कृत 'देववाणी' के रूप में आधुनिक वैश्विक आवश्यकता है। विवेक रंजन श्रीवास्तव



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