Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Bhopal व्यंग्य : हमको राजा जी माफ करना Sarcasm: Please forgive me, King.

Upgrade Jharkhand News.  लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई। किसी शायर ने खूब कहा है। आवेश में न जाने कौन कब क्या कर गुजरे, इसका उस समय तो अहसास नहीं होता, लेकिन जब आधुनिक तकनीक से कैमरे खंगाले जाते हैं, पत्थरों पर उंगलियों के निशान की पहचान करके आधार कार्ड के आधार पर पूरे खानदान का बायोडाटा गुमशुदा की तलाश करता हैं तब लगता है, कि पुलिस और कानून के हाथ वाकई लम्बे होते हैं।          कुछ समय पहले राजधानी की सड़कों पर सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। नाम चाहे उसे कुछ भी दिया गया हो, किन्तु था सांस्कृतिक समारोह ही। आधुनिकता की ओर देश की युवा पीढ़ी के बढ़ते कदमों का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन हुआ। स्वच्छंद विचारों से समृद्ध युवतियों ने कुछ युवकों के साथ मिलकर अपने पारिवारिक संस्कारों की प्रस्तुति दी। उस प्रस्तुति में मर्यादित भाषा का भरपूर प्रयोग किया गया। नए नए नारों का विशिष्ट भाव भंगिमाओं के साथ मंचन किया गया। रील का युग है, सो रील भी बहुत बनाई गई। 


उदीयमान कलाकार अपनी इस उपलब्धि पर प्रसन्न थे। कोई नायक के प्रति अति सम्मानजनक शब्दों को आलाप रहा था, तो कोई नायक को मासिक धर्म से व्यथित सिद्ध कर रहा था। एक ने तो हद ही कर दी, नायक की तेरहवीं का प्रसाद बांटने लगी। प्रसाद में लड्डू, कचौरी,  रायता, काशीफल, दम आलू के परंपरागत व्यंजनों की जगह केवल समोसों का वितरण करके प्रतीकात्मक तेरहवीं का पुण्य प्राप्त किया। आयोजन था भी तेरहवीं जैसा ही। गड़े मुर्दे को उखाड़कर उसकी तेरहवीं करने का। कोई प्रश्न पत्र लीक हुआ, प्रश्नपत्र से जुड़ी परीक्षा दोबारा हो गई, उसका परिणाम भी आ गया, किन्तु किसी को उससे कोई सरोकार नहीं था, उन्हें तो बस प्रश्न पत्र लीक होने का गड़ा मुर्दा उखाड़ कर तेरहवीं करनी थी। तेरहवीं में शोक व्यक्त करना था। शोक की घडी में जो भी शामिल हुआ, वह अपनी कला संस्कृति के सन्देश देने लगा। अधोवस्त्र धारी सभ्यता सड़कों पर अवतरित हुई। जिसे लज्जा की देवी समझा जाता था, वह लज्जा का आँचल उतार कर ब्लू फिल्म के फिल्मांकन में मशगूल हो गई। अधिक लाइक पाने की चाह में उत्कृष्ट संवादों से साथ उत्तम अभिनय भी किया। रील वायरल होनी ही थी। कलाकारों के घरवालों, नाते रिश्तेदारों, अडोसी पड़ोसियों के मोबाइल तक पहुंच गई। सुरक्षा बलों तक पहुँच गई। उनके उत्कृष्ट अभिनय की प्रशंसा होने लगी। फिर क्या था।  प्रसिद्धि इतनी बढ़ गई, कि वे सेलिब्रिटी बन गए। सार्वजनिक स्थलों पर उनका नागरिक अभिनन्दन होने लगा। मेट्रो ट्रेन से लेकर उनके घर की गलियों तक। उन्हें चिंता सताने लगी, कि कहीं उनकी प्रसिद्धि से प्रभावित होकर उनकी रील को पुलिसिया जांच का हिस्सा न बना दिया जाए। 


अब सेलिब्रिटी परेशान हैं। दोबारा से अपनी रील बना रहे हैं। टसुए बहा रहे हैं। बार बार गुहार लगा रहे हैं, कि कोई पुलिस को उनके घर का पता न बताए। कोई कह रहा है - हमको राजा जी माफ करना गलती म्हारे से हो गई। समझ नहीं आता कि गलती उनसे हुई या उनके,मां बाप से, जिन्होंने उन्हें रील बनाने की आजादी दी। सुधाकर आशावादी



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU