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Jamshdpur मुर्दा मैदान का कचरा नगर निगम कार्यालय के सामने डंप The garbage of the mortuary is dumped in front of the Municipal Corporation office.

 


सरयू राय ने कहा—अब निगम हटाए कचरा

सरयू के सवाल

  • दो साल से मुर्दा मैदान की सफाई क्यों नहीं हुई?
  • आदिवासियों की अनापत्ति के बावजूद क्यों नहीं जागा नगर निगम?
  • पार्षदों के संदेशों के बावजूद डंपिंग स्थान की जानकारी क्यों नहीं दी?
  • नगर निगम की बैठक क्यों नहीं बुलाई जाती?

Upgrade Jharkhand News. मानगो के मुर्दा मैदान की दो साल से सफाई नहीं होने पर विधायक सरयू राय ने रविवार को खुद मोर्चा संभाल लिया। सात दिनों का अल्टीमेटम देने के बावजूद नगर निगम ने सफाई नहीं कराई तो सरयू राय तीन ट्रैक्टर, हाईवा और जेसीबी लेकर मैदान पहुंचे। वहां बस्ती वालों के सहयोग से कचरा उठवाया और रविवार शाम चार बजे मानगो नगर निगम कार्यालय के सामने खाली पड़ी जमीन पर डंप करवा दिया। सरयू राय ने कहा कि उन्होंने निगम के अपर नगर आयुक्त से कचरा डंप करने की जगह बताने को कहा था, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। ऐसे में कचरा नगर निगम कार्यालय के सामने खाली जमीन पर गिरा दिया गया। अब निगम उसे जहां ले जाना चाहे, ले जाए।


सरयू राय ने बताया कि मुर्दा मैदान में पिछले दो वर्षों से सफाई नहीं हुई थी। लोग वहां कचरा डालते थे। बरसात खत्म होने के समय मैदान से उठने वाली दुर्गंध लोगों को परेशान करती थी। स्थानीय लोग और कुछ वार्ड पार्षद उनसे मिले तथा सफाई कराने की मांग की। इसके बाद उन्होंने मानगो नगर निगम से मैदान की सफाई कराने को कहा। सरयू राय ने बताया कि नगर निगम ने जमीन के मालिकाना हक का मामला उठाते हुए कहा कि यह आदिवासियों की जमीन है और वे साफ-सफाई का विरोध करते हैं। इसके बाद एक अक्टूबर को उन्होंने आदिवासी नेताओं से बात की। आदिवासी नेताओं ने आशंका जताई कि मैदान की सफाई होने के बाद लोग उस पर अतिक्रमण कर लेंगे। सरयू राय ने उन्हें बताया कि मैदान की घेराबंदी के लिए डेढ़ साल पहले ही कल्याण विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मई माह में सीओ ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। स्वीकृति मिलते ही पूरे मैदान की घेराबंदी कराई जाएगी। उन्होंने आदिवासी नेताओं से कहा कि घेराबंदी होने के बाद अतिक्रमण कैसे होगा? आदिवासी नेताओं ने उनसे लोगों से यह आश्वासन दिलाने को कहा कि जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। लोगों ने आश्वासन दिया, जिसके बाद आदिवासी नेता मैदान की सफाई के लिए तैयार हो गए।


सरयू राय ने इसकी सूचना नगर निगम को दी और सफाई कराने को कहा। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त को अल्टीमेटम दिया कि सात दिनों के भीतर मुर्दा मैदान की सफाई कराई जाए। ऐसा नहीं होने पर आठवें दिन वे खुद सफाई कराएंगे। रविवार को नौवां दिन था, लेकिन नगर निगम ने सफाई नहीं कराई। इसके बाद सरयू राय तीन ट्रैक्टर, हाईवा और जेसीबी लेकर मैदान पहुंचे। सफाई शुरू हुई। कचरे से वाहन भर गए।


सरयू राय ने बताया कि उन्होंने अपर नगर आयुक्त से कहा था कि अगर नगर निगम सफाई नहीं करेगा तो वे खुद कचरा उठवाएंगे। उन्होंने अधिकारी से यह भी पूछा था कि मानगो का कचरा कहां डंप किया जाता है उन्हें बता दें ताकि मुर्दा मैदान से उठाए गए कचरे को सीधे वहां पहुंचाया जा सके। अपर नगर आयुक्त ने डंपिंग स्थल की जानकारी भी नहीं दी, सफाई भी नहीं करवाई। आधा दर्जन वार्ड पार्षदों ने भी उन्हें व्हाट्सऐप संदेश भेजकर कचरा डंप करने की जगह बताने को कहा, ताकि कचरा वहीं गिराया जा सके। इसके बावजूद कोई जानकारी नहीं दी गई।


सरयू राय ने कहा कि अंततः रविवार शाम चार बजे मुर्दा मैदान से उठाया गया पूरा कचरा मानगो नगर निगम कार्यालय के सामने खाली पड़ी जमीन पर गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि कचरा उठाकर वे अपने घर तो ले नहीं जा सकते थे। अगर अधिकारी डंपिंग स्थल बता देते तो वे सीधे वहीं कचरा गिरा देते। यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने नगर निगम कार्यालय के सामने कचरा डाल दिया। नगर निगम ने मुर्दा मैदान की सफाई में कोई सहयोग नहीं किया और कचरा निस्तारण की जगह भी नहीं बताई। अब निगम को तय करना है कि उस कचरे को कहां ले जाना है।

नगर निगम की सेवा इमरजेंसी सेवा है, संडे-मंडे से कोई लेना-देना नहीं

सरयू राय ने नगर निगम कार्यालय बंद रहने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम की सेवा इमरजेंसी सेवा है। उसे संडे-मंडे से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद रविवार का बहाना बनाकर पूरा निगम कार्यालय बंद था।

मेयर और अपर नगर आयुक्त पर कोई असर नहीं होता

सरयू राय ने मानगो नगर निगम की मेयर और अपर नगर आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन पर किसी बात का असर नहीं होता, जूं तक नहीं रेंगती। उन्होंने कहा कि मेयर उनसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रखती हैं तो रखें, लेकिन कम से कम वार्ड पार्षदों से तो बात कर सकती हैं। पार्षदों से बातचीत कर निगम को सहयोग लेकर काम करना चाहिए था।

बोर्ड की बैठक पर उठाए सवाल

राय ने झारखंड नगरपालिका अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि महीने में एक बार बोर्ड की बैठक होनी चाहिए और पार्षदों के साथ बैठक कर कामकाज पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली बैठक चार महीने बाद बुलाई गई। उस बैठक को संपन्न हुए दो महीने बीतने जा रहे हैं, लेकिन अगली बैठक को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम विधायक का सहयोग भी नहीं ले रहा है और अधिकारी अपने मन से काम कर रहे हैं। हर वार्ड में सुपरवाइजर बहाल कर लिए गए हैं, लेकिन जमीन पर काम नहीं हो रहा है। सरयू राय ने कहा कि नगर निगम मानो मरणासन्न हो गया है।

उपायुक्त से अधिकारियों के खिलाफ कड़ी रिपोर्ट भेजने की मांग

सरयू राय ने कहा कि उन्होंने उपायुक्त से नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ कड़ी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजने को कहा है। उनके अनुसार, अधिकारी न तो जनप्रतिनिधियों से बात करते हैं और न ही चिट्ठियों का जवाब देते हैं। मुर्दा मैदान से कचरा उठाकर नगर निगम कार्यालय के सामने डंप करने की कार्रवाई के जरिए सरयू राय ने सफाई व्यवस्था, कचरा निस्तारण और निगम के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निगम समय पर सफाई कराता और कचरा डंप करने की जगह बता देता, तो कार्यालय के सामने कचरा गिराने की नौबत नहीं आती।



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