उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए खेल रोजगार का साधन बनता जा रहा है। इसके अलावा खेलों से स्वास्थ्य तो ठीक रहता ही है और मनुष्य का चारित्रिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। नियमित खेल से पुष्ट और स्फूर्तिमय शरीर ही मन को स्वस्थ बनाता है। खेलकूद मानव मन को प्रसन्न और उत्साहित बनाये रखता हैं। खेलों से नियम पालन के स्वभाव का विकास होता है और मन एकाग्र होता है।
खेल में भाग लेने से खिलाड़ियों में सहिष्णुता, धैर्य और साहस का विकास होता है तथा सामूहिक सद्भाव और भाईचारे की भावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि खेलकूद अप्रत्यक्ष रूप से आध्यात्मिक विकास में भी सहायक होता हैं ये जीवन संघर्ष का मुकाबला करने की शक्ति प्रदान करती है। खेलकूद से एकाग्रता का गुण आता है जिससे अध्यात्म साधना में मदद मिलती है।
राकेश वर्मा ने कहा कि सच्चा खिलाड़ी हानि - लाभ, यश - अपयश एवं सफलता - असफलता को समान भाव से ग्रहण करने का अभ्यस्त हो जाता है। खेलों में भाग लेने से तन मन की शक्ति के साथ-साथ हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है। तन-मन से स्वस्थ आत्मविश्वासी व्यक्ति के लिए जीवन में कोई भी काम करना कठिन नहीं होता। इस अवसर पर आयोजक क्लब के सदस्य, खिलाड़ी एवं काफी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।

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