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छऊ नृत्य मार्शल आर्ट व लोक परंपराओं वाला एक अर्ध शास्त्रीय भारतीय नृत्य है : अरुण महतो, Chhau dance is a semi-classical Indian dance with martial arts and folk traditions: Arun Mahato


नीमडीह के अरुण महतो राष्ट्रीय स्तर कला उत्सव के लिए छऊ नृत्य प्रशिक्षक नियुक्त

चांडिल। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्तर कला उत्सव 2023 - 2024 के लिए मानभूम शैली के छऊ नृत्य लोककला प्रशिक्षण हेतु नीमडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती आंडा गांव निवासी अरुण कुमार महतो को प्रशिक्षक नियुक्त किया गया है। कलाकारों को जे सी ई आर टी भवन रातु, रांची में चल रही है। प्रशिक्षण शिविर 23 दिसंबर से शुरू हुआ एवं 6 जनवरी को संपन्न होगा। 


अरुण महतो ने सिंगापुर, कारण, हांगकांग, मलेशिया आदि देशों में मानभूम शैली के छऊ नृत्य लोककला का प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया। अरुण का छऊ गुरु श्री कृष्ण की भूमिका में नृत्य प्रस्तुत करने से भारत प्रसिद्ध उस्ताद बंशीधर महतो है। इस लोककला के संबंध में प्रशिक्षक अरुण कुमार महतो ने कहा कि छऊ नृत्य, जिसे छौ नाच भी कहा जाता है, मार्शल आर्ट और लोक परंपराओं वाला एक अर्ध शास्त्रीय भारतीय नृत्य है। यह तीन शैलियों में पाया जाता है जिनका नाम उस स्थान के नाम पर रखा गया है जहां उनका प्रदर्शन किया जाता है।


छऊ नृत्य मूल रूप से भूमिज, मुण्डा, कुम्हार, कुड़मी महतो, डोम, खंडायत, तेली, पत्तानिक, समल, दरोगा, मोहन्ती, भोल, आचार्या, कर, दुबे और साहू सम्प्रदाय के लोगो के द्वारा किया जाता है। छऊ नाच के संगीत मुखि, कलिन्दि, धदा के द्वारा दिया जाता हैं। छऊ नृत्य में एक विशेष तरह का मुखौटा का इस्तेमाल होता है, जो पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के चढ़ीदा गांव और सरायकेला के सम्प्रदायिक महापात्र, महारानी और सूत्रधर के द्वारा बनाया जाता है। नृत्य संगीत और मुखौटा बनाने की कला और शिल्प मौखिक रूप से प्रेषित किय जाता है। यह मुख्यत: क्षेत्रीय त्योहारों में प्रदर्शित किया जाता है। वसंत त्योहार के चैत्र पर्व पर तेरह दिन तक छऊ नृत्य का समारोह चलता है। हर वर्ग के लोग इस नृत्य में भाग लेते हैं।

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