Guwa (Sandeep Gupta) टाटा डी.ए.वी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में स्वामी विवेकानंद जी का 163वाँ जन्मदिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय के प्राचार्य प्रशांत कुमार भूयान ने स्वामी विवेकानंद के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। तत्पश्चात विद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं ने विवेकानंद जी के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया। इसके उपरांत विद्यालय के संगीत शिक्षक अरविंद ठाकुर के दिशा निर्देश में विद्यालय के छात्र -छात्राओं द्वारा संगीत प्रस्तुत किया गया।
आज के प्रमुख वक्ता काजल घोष ने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद जी के जीवनी के बारे में विस्तार पूर्वक प्रकाश डालें। बताया कि स्वामी विवेकानंद (जन्म: 12 जनवरी, 1863, कोलकाता; निधन: 4 जुलाई, 1902) एक महान आध्यात्मिक गुरु, विचारक और समाज सुधारक थे, जिनका बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों का प्रचार किया। भारतीय दर्शन (वेदांत और योग) को विश्व में फैलाया।
विद्यालय के प्राचार्य प्रशांत कुमार भूयान अपने वक्तव्य में कहा कि 1893 में वे शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका गए, जहाँ ‘अमेरिकी वासियों, बहनों और भाइयों’ कहकर उन्होंने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया और भारतीय आध्यात्म का प्रचार किया। कहा कि आत्म-विश्वास और निडरता, चरित्र निर्माण, मानवता की सेवा, और समग्र शिक्षा (शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक विकास) शामिल हैं, जो व्यक्ति के आंतरिक सामर्थ्य को जगाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने पर केंद्रित हैं। स्वामी विवेकानंद जी का कथन उठो, जागो और तब तक ना रुको जब तक के लक्ष्य प्राप्ति ना हो जाए। यह संदेश सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इस अवसर पर कूट प्रश्नोत्तरी, चित्रांकन, एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का सफल प्रारूप बनाने में सी.सी.ए प्रभारी शिक्षक डी.के देव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अनुशासन व्यवस्था को दुरुस्त करने में कीड़ा शिक्षक हर्ष धनवार सक्रिय रहे। तकनीकी व्यवस्था में शिक्षिका कुसुम कुमारी का साथ शिक्षिका अंतरा चौधरी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक सचिन चंद्र साव ने किया। इस मौके पर विद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं राष्ट्रगान गाकर कर किया गया।

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