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Jamshedpur चिदंबरम सुब्रमण्यम- भारत में हरित क्रांति के पीछे का चेहरा, जिसने कभी इसका श्रेय नहीं लिया Chidambaram Subramaniam – the man behind India's Green Revolution, who never took credit for it

 


Upgrade Jharkhand News. चिदंबरम सुब्रमण्यम, पूर्व खाद्य और कृषि मंत्री, ने उच्च उपज वाली बीज किस्मों और गहन उर्वरक की शुरुआत की, जिसने उत्पादन में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया.सुब्रमण्यम एक वरिष्ठ राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व केंद्रीय खाद्य और कृषि मंत्री थे।उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में कानून की शिक्षा ली। युवावस्था में ही वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए और महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित हुए। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और कई बार जेल भी गए।


स्वतंत्रता के बाद, सुब्रमण्यम ने राजनीति में सक्रिय रूप से प्रवेश किया। वे तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य बने और बाद में राज्य सरकार में शिक्षा और वित्त मंत्री के पद पर रहे। 1962 में वे लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने इस्पात और खान, परिवहन, योजना, रक्षा और कृषि मंत्रालयों में मंत्री के रूप में सेवा की।


हरित क्रांति का सूत्रधार -सुब्रमण्यम की सबसे बड़ी उपलब्धि 1960 के दशक में कृषि मंत्री के रूप में हरित क्रांति की शुरुआत करना था। उस समय भारत गंभीर खाद्यान्न संकट का सामना कर रहा था। उन्होंने एक महत्वपूर्ण दौर में निर्णायक भूमिका निभाई जब भारत गंभीर खाद्य कमी और अनाज आयात पर निर्भरता का सामना कर रहा था।1960 के दशक में कृषि मंत्री के रूप में, उन्होंने साहसिक नीतिगत बदलावों का समर्थन किया जिसने भारत के कृषि क्षेत्र को बदल दिया।उनके नेतृत्व ने भारत को खाद्य कमी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद की।स्टेटिक जीके तथ्य: सी. सुब्रमण्यम को लोकप्रिय रूप से “भारत की हरित क्रांति के वास्तुकार” के रूप में जाना जाता था।



 सी. सुब्रमण्यम के तहत हरित क्रांति ने वैज्ञानिक खेती और संस्थागत सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें अधिक उपज देने वाली किस्म (HYV) के बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और सुनिश्चित सिंचाई की शुरुआत की गई।उन्होंने एम. एस. स्वामीनाथन जैसे कृषि वैज्ञानिकों के साथ सहयोग का पुरजोर समर्थन किया।इस साझेदारी ने यह सुनिश्चित किया कि वैज्ञानिक नवाचार नीतिगत समर्थन के माध्यम से किसानों तक पहुंचे।स्टेटिक जीके तथ्य: हरित क्रांति ने शुरू में गेहूं उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।सी. सुब्रमण्यम की नीतियों ने एक दशक के भीतर खाद्यान्न उत्पादन में काफी वृद्धि की।भारत ने PL-480 खाद्य आयात पर अपनी निर्भरता कम की और रणनीतिक खाद्य स्वायत्तता हासिल की।


बफर स्टॉक और मूल्य समर्थन तंत्र के निर्माण ने किसान की आय और उपभोक्ता कीमतों दोनों को स्थिर किया।इन सुधारों ने दीर्घकालिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की नींव रखी।व्यापक राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश यह घोषणा चुनावी राजनीति से परे योगदान देने वालों को पहचानने पर तमिलनाडु के ज़ोर को उजागर करती है। यह एक ऐसे शासन दृष्टिकोण को दर्शाती है जो नीतिगत प्रभाव, राष्ट्र निर्माण और संस्थागत विरासत को महत्व देता है। सी. सुब्रमण्यम को सम्मानित करने से कृषि नीति पर होने वाली बहसों पर भी नए सिरे से ध्यान जाता है।यह नागरिकों को स्थायी खाद्य उत्पादन के स्थायी महत्व की याद दिलाता है।


कृषि के अलावा, सुब्रमण्यम ने शिक्षा, औद्योगीकरण और रक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया और कई आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना में सहायता की। रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुब्रमण्यम के योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान मिले। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें हरित क्रांति के पिता के रूप में याद किया जाता है।  विभिन्न कृषि संस्थानों और पुरस्कारों का नाम उनके सम्मान में रखा गया है।


व्यक्तित्व और विरासत -सुब्रमण्यम एक दूरदर्शी नेता, कुशल प्रशासक और समर्पित राष्ट्रसेवक थे। उनका व्यक्तित्व सरल और विनम्र था। वे सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध और निर्णयों में साहसी थे। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे विरोध के बावजूद अपने विश्वास पर दृढ़ रहे। सी. सुब्रमण्यम का 7 नवंबर 2000 को निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। हरित क्रांति के माध्यम से उन्होंने न केवल भारत को खाद्यान्न संकट से उबारा बल्कि लाखों किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया। आज भारत विश्व में चावल और गेहूं का प्रमुख उत्पादक देश है, यह सुब्रमण्यम की दूरदर्शिता का ही परिणाम है। सी. सुब्रमण्यम का जीवन हमें सिखाता है कि साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से कैसे असंभव लगने वाले लक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकता है। वे सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक थे और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।



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