- परिवर्तन के दूत जिन्होंने रूढ़ियों को तोड़कर समाज को नई दिशा दी*
Upgrade Jharkhand News. केशव चन्द्र सेन का जन्म 19 नवंबर 1838 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता प्यारीमोहन सेन एक सम्पन्न व्यापारी थे। केशव चन्द्र सेन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता के प्रसिद्ध हिन्दू कॉलेज से प्राप्त की, जहां उन्हें पाश्चात्य शिक्षा और विचारधारा का गहन ज्ञान मिला। यहीं से उनके मन में सामाजिक सुधार की भावना जागृत हुई।
ब्रह्म समाज से जुड़ाव -1857 में, केशव चन्द्र सेन ब्रह्म समाज से जुड़े, जो राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित एक धार्मिक और सामाजिक सुधार आंदोलन था। उनकी प्रतिभा और वक्तृत्व कौशल ने शीघ्र ही लोगों का ध्यान आकर्षित किया। 1858 में वे ब्रह्म समाज के सक्रिय सदस्य बन गए और 1862 में उन्हें ब्रह्म समाज का आचार्य नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में ब्रह्म समाज का प्रचार-प्रसार तेजी से हुआ।
सामाजिक सुधार के प्रयास -केशव चन्द्र सेन ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित कर दिया। उन्होंने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, अंतर्जातीय विवाह और बाल विवाह के उन्मूलन के लिए अथक प्रयास किए। वे जाति प्रथा के कट्टर विरोधी थे और समाज में समानता के पक्षधर थे।उन्होंने 1861 में "इंडियन मिरर" नामक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया, जो सामाजिक सुधार का एक शक्तिशाली माध्यम बना। इसके माध्यम से वे अपने विचारों को जनता तक पहुंचाते थे।
भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना -1866 में केशव चन्द्र सेन और देवेन्द्रनाथ टैगोर के बीच वैचारिक मतभेद हो गए। देवेन्द्रनाथ टैगोर परंपरागत हिन्दू रीति-रिवाजों को बनाए रखना चाहते थे, जबकि केशव चन्द्र सेन अधिक कट्टरपंथी सुधार चाहते थे। इस मतभेद के परिणामस्वरूप केशव चन्द्र सेन ने "भारतीय ब्रह्म समाज" की स्थापना की। यह संगठन अधिक प्रगतिशील था और जाति भेद को पूर्णतः अस्वीकार करता था।
विवाह कानून और सामाजिक कार्य -केशव चन्द्र सेन के अथक प्रयासों के फलस्वरूप 1872 में ब्रिटिश सरकार ने "नेटिव मैरिज एक्ट" पारित किया, जिसे "ब्रह्म मैरिज एक्ट" के नाम से भी जाना जाता है। इस कानून ने अंतर्जातीय विवाह को कानूनी मान्यता दी और बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाया। यह भारतीय समाज सुधार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए कई स्कूल खोले और विधवाओं के पुनर्विवाह को बढ़ावा दिया। उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए।
धार्मिक विचार और नव विधान -केशव चन्द्र सेन के धार्मिक विचार अद्वितीय थे। वे सभी धर्मों में सत्य देखते थे और विभिन्न धर्मों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में विश्वास रखते थे। उन्होंने ईसाई धर्म, इस्लाम और हिन्दू धर्म के विचारों को समन्वित करने का प्रयास किया। 1878 में, अपनी पुत्री के विवाह के बाद, जो बाल विवाह था और उनके सिद्धांतों के विपरीत था, उनके कई अनुयायियों ने उनका साथ छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने "नव विधान" या "न्यू डिस्पेंसेशन" की स्थापना की, जो एक नया धार्मिक आंदोलन था जिसमें विभिन्न धर्मों के तत्वों का समावेश था।
इंग्लैंड यात्रा और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव -1870 में केशव चन्द्र सेन इंग्लैंड की यात्रा पर गए, जहां उन्होंने अपने विचारों को प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यानों ने ब्रिटिश समाज में गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने महारानी विक्टोरिया से भी मुलाकात की। उनकी इस यात्रा ने भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
व्यक्तित्व और योगदान -केशव चन्द्र सेन एक प्रभावशाली वक्ता थे। उनके भाषणों में जोश और तार्किकता का अद्भुत मिश्रण होता था। वे तीन भाषाओं - बांग्ला, अंग्रेजी और हिन्दी में प्रवीण थे और इन सभी भाषाओं में प्रभावी ढंग से अपने विचार व्यक्त कर सकते थे। उनका सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने धर्म और समाज सुधार को जोड़ा। उन्होंने दिखाया कि सच्चा धर्म सामाजिक न्याय और समानता का समर्थन करता है। उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रेरित किया और कई युवाओं ने उनके आदर्शों से प्रभावित होकर सामाजिक सुधार के कार्यों में भाग लिया।
अंतिम दिन और विरासत -केशव चन्द्र सेन का निधन 8 जनवरी 1884 को मात्र 45 वर्ष की आयु में हुआ। उनकी मृत्यु से भारतीय समाज सुधार आंदोलन ने एक महान नेता खो दिया। हालांकि, उनके विचार और कार्य आज भी प्रासंगिक हैं।उनकी विरासत केवल ब्रह्म समाज तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारतीय नवजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य कई महान व्यक्तित्व उनके विचारों से प्रभावित हुए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति अपने दृढ़ संकल्प और समर्पण से समाज में बड़े बदलाव ला सकता है।
केशव चन्द्र सेन भारतीय इतिहास के महान समाज सुधारकों में से एक थे। उन्होंने अपने समय की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी और एक अधिक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रयास किया। उनका जीवन संघर्ष, साहस और सिद्धांतों के प्रति समर्पण की कहानी है। आज भी उनके आदर्श और विचार हमें एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।


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