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Jamshedpur साईं भक्ति केवल पूजा नहीं, जीवन जीने की कला है: डॉ. चंद्रभानु सत्पथी जी ,श्री साईं सेंटर जमशेदपुर में महान आध्यात्मिक गुरु का आगमन; प्रेम, करुणा और संस्कारों का दिया संदेश Sai devotion is not just worship, it is an art of living: Dr. Chandrabhanu Satpathy, the great spiritual guru arrives at Sri Sai Centre, Jamshedpur; gives the message of love, compassion and values.

 


Jamshedpur (Nagendra) सर्किट हाउस एरिया स्थित श्री साईं सेंटर में आज उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जब महान आध्यात्मिक गुरु, प्रख्यात साईं भक्त एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ. चंद्रभानु सत्पथी जी (गुरुजी) का आगमन हुआ। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1972 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. सत्पथी ने ही 18 अक्टूबर 2012 को इस सेंटर की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई थी। आज उनके पुनः शुभागमन से पूरा परिसर भक्ति भाव से सराबोर हो गया। भव्य स्वागत और सम्मान– केंद्र के अध्यक्ष एवं विख्यात उद्योगपति एस. के. बेहरा ने गुरुजी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर महासचिव अमरेश सिन्हा और  विजय मेहता सहित अन्य पदाधिकारियों ने गुरुजी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। गुरुजी ने मंदिर में बाबा की विशेष पूजा-अर्चना और प्रदक्षिणा की, जिसके बाद उन्होंने उपस्थित सैकड़ों भक्तों को संबोधित किया।


गुरुजी का दिव्य संदेश: "मंदिरों को 'विंडो शॉपिंग' न बनाएं" अपने संबोधन में डॉ. सत्पथी जी ने भक्ति के पारंपरिक ढर्रे पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा: कि "साईं बाबा किसी विशेष पूजा विधि का नाम नहीं, बल्कि वे प्रेम और करुणा के सजीव स्वरूप हैं। आज मंदिरों को 'भगवान की विंडो शॉपिंग' बना दिया गया है, जो चिंताजनक है। असली भक्ति केवल मंदिर जाने में नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे कर्म और संवेदनशीलता अपनाने में है।" उन्होंने संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। गुरुजी ने वर्तमान पीढ़ी और पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म के नाम पर दिखावा और मूर्खता बढ़ रही है। उन्होंने महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए:  * माता-पिता की सेवा: माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। अपने परिवार की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाना ही सच्ची पूजा है।


 * बच्चों के संस्कार: बच्चों को आध्यात्मिक आयोजनों से जोड़ना अनिवार्य है क्योंकि संस्कार बचपन से ही विकसित होते हैं। बच्चों के बिगड़ने पर भगवान को दोष देने से पहले माता-पिता को अपनी जिम्मेदारी देखनी चाहिए।

 * कर्मयोगी संत: संतों को केवल 'चमत्कारी' बताकर उनकी शिक्षाओं को नजरअंदाज करना गलत है। साईं बाबा हों या गुरु गोबिंद सिंह, उन्होंने त्याग और करुणा की जो परिभाषा गढ़ी है, उसका पालन करना ही जीवन की सफलता है।


कार्यक्रम के दौरान उत्कल एसोसिएशन के कलाकारों द्वारा शास्त्रीय नृत्य, ओड़िशी और भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिसने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। *सचिव अमरेश सिन्हा ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से सेंटर द्वारा किए जा रहे सामाजिक और सेवा कार्यों का विवरण साझा किया, जिसकी गुरुजी ने मुक्त कंठ से सराहना की। वहीं एस. के. बेहरा ने कहा कि गुरुजी का मार्गदर्शन हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है। उनके द्वारा स्थापित यह केंद्र उनके बताए प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा के नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए संकल्पित है। गुरुजी ने सेंटर के उत्तरोत्तर विकास पर प्रसन्नता व्यक्त की और भक्तों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।



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