- बिष्टुपुर तुलसी भवन में हवन यज्ञ और भंडारे के साथ भागवत कथा का विश्राम
Jamshedpur (Nagendra) श्रीमद्भागवत कथा के सुदामा चरित्र, कुरुक्षेत्र लीला, श्री कृष्ण उद्धव संवाद के प्रसंगों में निश्छल मित्रता, भगवत्प्राप्ति, भक्ति और वैराग्य का गहरा सार छिपा है, जहाँ सुदामा की दरिद्रता में भी अटूट मित्रता, कृष्ण की लीलाओं से कर्तव्यबोध और उद्धव के माध्यम से ऐश्वर्य त्याग कर ज्ञान (भक्ति) का संदेश दिया जाता है, जो अंततः कथा के विश्राम (समापन) में पूर्णता और परम शांति की ओर ले जाता है, जिससे मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त हो सके। मोह मिटने पर ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। भागवत कथा बताती है कि कैसे जीवन में सुख-दुःख, धन-निर्धन सब माया है, और केवल भगवत्प्रेम ही सत्य है।. यह उद्गार बिष्टुपुर तुलसी भवन में शारणागति परिवार, जमशेदपुर द्धारा आयोजित भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन बुधवार को सुबह वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक रसिया बाबा ने व्यासपीठ से कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए व्यक्त किए।
बुधवार को कथा के विश्राम पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे (प्रसाद) का भी आयोजन किया गया। उपस्थित भक्तों द्वारा भागवत कथा के विश्राम पर हवन यज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। हवन एवं पुर्णाहुति के बाद लगभग 500 से अधिक भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथावाचक ने कहा कि कथाव्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सुदामा चरित्र की कहानी बताती है कि धन-संपदा महत्वहीन है, सच्ची मित्रता और भक्ति का कोई मोल नहीं। कृष्ण, सुदामा की दरिद्रता देखकर भावुक हो जाते हैं और उन्हें बिना माँगे ही सब कुछ प्रदान करते हैं, जिससे सुदामा का जीवन बदल जाता है।. भक्त सुदामा चरित्र का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो गए। आज की कथा क्रम में कथाव्यास ने आगे बताया कि भगवान की प्रत्येक लीला जीव को बंधनों से मुक्त कराने वाली है।
हमें हृदय से प्रभु चरणों में प्रीति उत्पन्न हो जाना ही हमारे मोक्ष के द्वार भी खोल देती है। जब तक जीव मोह में फँसा रहता है तब तक उसके मोक्ष के द्वार भी बंद रहते हैं। प्रभु के मंगलमय पावन चरित्र संसार की अनिश्चितताओं का बोध कराकर अनासक्त जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। सातों दिन कथा को सफल बनाने पर प्रमुख रूप से बृजमोहन बागड़ी, विमल रिंगसिया अग्रवाल, प्रदीप मित्तल (बंटी), मनोज शर्मा, सतीश जायसवाल, अजय सरायवाला, राजकुमार दोदराजका, विश्वनाथ महेश्वरी, घनश्याम पटवारी, प्रमीला आगीवाल, तनय झवर, अरुण धूत, राजेश गढ़वाल, नथमल शर्मा, विष्णु अग्रवाल, प्रदीप महेश्वरी, सुनील महेश्वरी, महेश केडिया, मुन्ना तापड़िया, प्रमिला आगीवाल आदि का योगदान रहा।

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