Jamshedpur (Nagendra) बिष्टुपुर तुलसी भवन में शारणागति परिवार, जमशेदपुर द्धारा आयोजित भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक रसिया बाबा ने व्यासपीठ से महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव-गोपी संवाद, रुक्मिणी विवाह कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाया। कहा कि भागवत कथा में आत के सभी प्रसंग श्रीकृष्ण की लीलाओं के महत्वपूर्ण भाग हैं, जिनमें महारास आत्मा-परमात्मा के मिलन, मथुरा गमन कंस के अत्याचार से मुक्ति, कंस वध दुष्टों का अंत, उद्धव-गोपी संवाद ज्ञान और भक्ति का समन्वय, और रुक्मिणी विवाह सत्य संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है। कथाव्यास ने रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया।
यह प्रसंग कन्याओं को अच्छे वर और सुखद दांपत्य जीवन की प्राप्ति की कामना से सुना जाता है। क्योंकि यह कथा जीव (रुक्मिणी) और परमात्मा (श्रीकृष्ण) के मिलन को दर्शाती है। यह दर्शाता है कि लक्ष्मी (रुक्मिणी) नारायण (श्रीकृष्ण) से दूर नहीं रह सकतीं। यह भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिए किया गया विवाह था। उन्होंने कहा कि महारास लीला जीवात्मा (गोपियों) और परमात्मा (श्रीकृष्ण) के मिलन की कथा है, जिसमें श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों को बुलाया और यह दिव्य रास रचा। यह आस्था और विश्वास से भगवत प्राप्ति का मार्ग दर्शाती है और मन को परमात्मा से जोड़ती है।
इसी प्रकार कथाव्यास द्धारा र्प्रस्तुत किये गये आज के सभी र्प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा। आज के मुख्य यजमान उषा-बृजमोहन बागड़ी, संगीता-प्रदीप मित्तल (बंटी), बीना-मनोज शर्मा, सुनीता-सतीश जायसवाल, शिल्पा-अजय सरायवाला थे। कथा के अंतिम और सातवें दिन बुधवार को सुबह 10 बजे से कथा होगी, जिसमें सुदामा चरित्र, कुरूक्षेत्र लीला, श्री कृष्ण उद्धव संवाद, श्रीमद भागवत कथा सार, कथा विश्राम प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी।

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