Jamshedpur (Nagendra) घाटशिला स्थित जे.सी हाई स्कूल में 'सुरक्षित एवं सशक्त महिला, सशक्त झारखंड' कार्यक्रम के अंतर्गत बाल विवाह मुक्त अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, घाटशिला, अनुमंडल के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी, घाटशिला ने कहा कि यदि प्रशासनिक पदाधिकारी, ग्राम प्रधान, मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं समाज के सभी प्रतिनिधि एकजुट होकर जमीनी स्तर पर कार्य करें, तो बाल विवाह, डायन प्रथा एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने अपील की कि बाल विवाह या डायन प्रथा जैसी किसी भी कुरीति की सूचना मिलने पर तुरंत अपने स्तर से या उच्च अधिकारी अथवा निकटतम थाना को अविलंब सूचित करें।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, गर्भवती महिलाओं को प्रथम एवं द्वितीय प्रसव बालिका होने पर प्रोत्साहन राशि आदि प्रमुख हैं।।जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने कहा कि बाल विवाह के मुख्य कारण सामाजिक परंपराएं और रूढ़ियां हैं, जिन्हें कुछ समाजों में परंपरा के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह से बच्चों के अधिकारों का हनन होता है, उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास बाधित होता है। उन्होंने बताया कि 15–19 वर्ष की किशोरियों में मातृ मृत्यु, एनीमिया, कुपोषण एवं शिक्षा के बीच में छूट जाने का खतरा अधिक होता है।
समय से पहले जिम्मेदारियां, हिंसा, यौन शोषण एवं विभिन्न रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इन सभी कुरीतियों के उन्मूलन हेतु समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। आपके सहयोग के बिना न तो समाज पूर्ण हो सकता है और न ही प्रशासन अपने दायित्वों का सफल निर्वहन कर सकता है। कार्यशाला में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना, डायन कुप्रथा उन्मूलन योजना, सामूहिक विवाह कार्यक्रम, निःशक्त कल्याणार्थ योजना सहित राज्य सरकार की विभिन्नजनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही मिशन शक्ति के अंतर्गत महिला सुरक्षा एवं महिला सशक्तिकरण घटक तथा डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 की भी जानकारी दी गई। बहरागोड़ा प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि ग्राम प्रधान समाज के अगुआ होते हैं और बाल विवाह रोकने में उनकी तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत के कुछ दक्षिणी राज्यों में किशोरी की पहली माहवारी को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। घाटशिला प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु में बच्चियों की शादी कराना या करवाना कानूनन अपराध है। इस अपराध में माता-पिता, परिवारजन, रिश्तेदार, पुजारी, मौलवी, बैंड-बाजा वाले, मुखिया एवं ग्राम प्रधान सहित विवाह में शामिल सभी व्यक्ति दोषी माने जाते हैं। उन्होंने बाल विवाह की सूचना टोल फ्री नंबर 181 पर देने की अपील की तथा यह आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। कार्यशाला में बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान, मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं, स्वयंसेवी संगठन एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।




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