- न्यायपालिका में भ्रष्टाचार तथ्य रखना बर्दाश्त नहीं
Upgrade Jharkhand News. क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि एनसीईआरटी एवं सीबीएसई के निदेशक तथा मानव संसाधन विभाग के सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के फैसले को देखते हुए सरकार को कठोर कदम उठाना चाहिए और जिम्मेदार ब्यूरोक्रेट पर अपराधी साजिश रचने की धारा के तहत फौजदारी मुकदमे दर्ज होने चाहिए।
कक्षा आठ की सामाजिक पुस्तक के अध्याय चार, हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका शीर्षक के के अंश में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र होना, पूरे विश्व में भारत की न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की नापाक कोशिशहै। यह संविधान की मूल भावना और संरचना पर हमला है। भारत के संविधान में शक्ति के पृथक्करण का सिद्धांत है और न्यायपालिका स्वतंत्र है। इसमें पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई को उद्धृत करना जरूर साजिश का हिस्सा है? क्या पाठ के माध्यम से गलत छवि और धारणा बनाकर न्यायपालिका पर नियंत्रण रखने की कोशिश तो नहीं है? यदि नहीं तो सरकार को कठोर संदेश देना चाहिए।
क्या हमारी जटिल न्यायिक प्रक्रिया, निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक में लंबित मुकदमों की संख्या, कॉलेजियम सिस्टम, जजों की कमी को आधार बनाकर क्या इसे भ्रष्टाचार से जोड़ा जा सकता है? कुलबिंदर सिंह ने हाल ही में यूजीसी के समता कमेटी के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि आखिरकार देश में मानव संसाधन विभाग इस तरह के अराजक गैरकानूनी फैसला क्यों ले रहा है जिससे समाज में बिखराव हो रहा है और पूरे दुनिया में भारत की छवि को आघात पहुंच रहा है।




































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