Jamshedpur (Nagendra) जाने-माने व्यवसायी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं परम पूज्य शंकराचार्य के प्रिय भक्त उमेश प्रसाद खिरवाल उर्फ टप्पू का 60 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। टप्पू लंबे समय से हार्ट की बीमारी से पीड़ित थे। एक माह पहले अचानक परेशानी बढ़ने के बाद उन्हें बेंगलुरु के नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां उनके हार्ट की सर्जरी हुई, लेकिन दुर्भाग्य बस वे होस संभाल नहीं पाए । एक माह तक कोमा में रहने के बाद आज तड़के रविवार को उनका निधन हो गया। इस घटना से पूरे जुगसलाई में खासकर व्यवसायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
टप्पू का असमय चला जाना व्यक्तिगत क्षति : अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू -वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने अपने शोक संवेदना में कहा है कि एक अजीज मित्र, सहयोगी और समर्पित दोस्त को मैंने खो दिया है, आने वाले समय में जिसकी भरपाई कठिन ही नहीं नामुमकिन है। अपने शोक संवेदना में अधिवक्ता पप्पू ने कहा कि टप्पू समाज सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। सप्ताह के प्रत्येक शनिवार को दरिद्र नारायण भोज का आयोजन वे नियमित रूप से करते थे। साधु संतों को दान उपदान करते और भोजन कराया करते थे। इसके अलावे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बच्चियों की शादी एवं बच्चों की पढ़ाई लिखाई में टप्पू बढ़ चढ़कर सहयोग किया करते थे। टप्पू जी शंकराचार्य जी के सानिध्य में रहकर सनातन हिंदू विचारधारा का प्रचार प्रसार करते रहे हैं। वे धर्म प्रेमी थे । परंतु अतिवादी नहीं थे। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने बताया कि उनके हार्ट का ऑपरेशन हुआ था और ब्रेन प्रभावित हो गया था। उसके बाद बेंगलुरु में उनका इलाज चल रहा था। जहां उन्होंने रविवार को अंतिम सांस ली। सोमवार को पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से जमशेदपुर पहुंचेगा और दोपहर तीन बजे जुगसलाई स्थित आवास से अंतिम यात्रा शुरू होगी। शिव घाट जुगसलाई में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
उमेश प्रसाद खिरवाल की दो बेटी और एक बेटा है। दोनों बेटियों की 2 वर्ष पहले उन्होंने शादी की थी। बेटे की शादी नहीं हुई है। उमेश प्रसाद खेरवाल उर्फ टप्पू कर्मयोगी थे। शून्य से अपना व्यापार शुरू किया और कारोबार को आगे बढ़ाया। अभी उनका कारोबार ठीक-ठाक चल रहा था । लगातार बीमार रहने की वजह से वर्तमान में उनका बेटा कारोबार देख रहा था। अचानक और असमय उनका चला जाना परिवार के लिए एक बड़ी मुसीबत है। भगवान उनके परिवार को इस दुख से उबरने और दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
शोक संवेदना -किसी भी तरह की परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति के साथ खड़ा होना और उनकी मदद करना उनके स्वभाव में था, आज के समय में ऐसा देखने को बहुत कम मिलता है। यह गुण टप्पू में कूट-कूट कर भरा हुआ था। यही कारण है कि उनके निधन से जमशेदपुर शहर के व्यवसायी वर्ग सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग भी काफी मर्माहत हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि ईश्वर उन्हें बैकुंठ में स्थान दें और को सहनशक्ति प्रदान करें , यही सबकी कामना है।

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