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Bhopal पुस्तक समीक्षा- 'आदि शक्ति माँ अवंतिका' - लालकुआँ के आध्यात्मिक वैभव और आस्था का जीवंत दस्तावेज़ Book Review - 'Adi Shakti Maa Avantika' - A living document of the spiritual splendor and faith of Lalkuan

 


Upgrade Jharkhand News. के.एस. परिहार-विभूति फीचर्स)

         उत्तराखंड की पावन देवभूमि के नैनीताल जनपद में स्थित लालकुआँ का माँ अवंतिका मंदिर न केवल क्षेत्रीय जनमानस की अटूट आस्था का केंद्र है, बल्कि इसका अपना एक समृद्ध और गौरवशाली इतिहास भी है। इसी आध्यात्मिक विरासत और भगवती की महिमा को शब्दों में पिरोने का भगीरथ प्रयास किया है देश के जाने-माने आध्यात्मिक विषयक पत्रकार और विभूति फीचर्स के प्रतिष्ठित लेखक रमाकान्त पन्त ने अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक "आदि शक्ति माँ अवंतिका" में।

       यह कृति पूर्णतः माँ अवंतिका मंदिर, लालकुआँ को केंद्र में रखकर लिखी गई है। पुस्तक के पन्नों से गुजरते हुए यह स्पष्ट होता है कि लेखक ने मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, स्थानीय मान्यताओं और दैवीय चमत्कारों का केवल संकलन ही नहीं किया है, बल्कि उन पर व्यापक शोध भी किया है। मंदिर की उत्पत्ति से लेकर उसके वर्तमान स्वरूप तक की यात्रा को अत्यंत प्रामाणिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

      रमाकान्त पन्त की लेखनी में एक अनुभवी पत्रकार की तथ्यात्मक दृष्टि और एक आध्यात्मिक चिंतक की वैचारिक गहराई का अनूठा संगम देखने को मिलता है। पुस्तक की भाषा अत्यंत सहज, प्रवाहमयी और भावपूर्ण है। क्लिष्ट शब्दों के बोझ से बचते हुए लेखक ने आम जनमानस तक माँ अवंतिका की महिमा पहुँचाने का सफल प्रयास किया है। वृत्तांत इतने सजीव हैं कि पाठक स्वयं को मंदिर परिसर में उपस्थित महसूस करता है।

      आमतौर पर क्षेत्रीय मंदिरों के इतिहास लिखित रूप में कम ही उपलब्ध होते हैं और वे केवल श्रुतियों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। ऐसे में "आदि शक्ति माँ अवंतिका" पुस्तक लालकुआँ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन गई है। यह भावी पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों, स्थानीय संस्कृति और लोक-आस्था को समझने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगी।

         "आदि शक्ति माँ अवंतिका" मात्र एक पुस्तक नहीं, बल्कि देवभूमि की एक प्रमुख शक्तिपीठ के प्रति अर्पित एक साहित्यिक पुष्पांजलि है। हर वह श्रद्धालु, शोधार्थी और आम पाठक जो कुमाऊँ के क्षेत्रीय इतिहास, यहाँ की संस्कृति तथा माँ भगवती की महिमा को निकट से जानना चाहता है, उसके लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है। रमाकान्त पन्त जी ने इस कृति के माध्यम से लालकुआँ के आध्यात्मिक महत्व को साहित्यिक और ऐतिहासिक पटल पर अंकित करने का जो सराहनीय कार्य किया है, उसके लिए वे साधुवाद के पात्र हैं।

      इस बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पुस्तक का विमोचन लालकुआँ स्थित माँ अवंतिका मंदिर के पावन प्रांगण में एक भव्य और गरिमामय समारोह में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अजय गुप्ता ने किया। उन्होंने  क्षेत्रीय इतिहास, संस्कृति तथा आध्यात्म को पुस्तक के रूप में सहेजने के इस भगीरथ प्रयास के लिए लेखक रमाकान्त पन्त की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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