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Bhopal दृष्टिकोण : हताश विपक्ष की कुंठा का फ्लॉप शो Viewpoint: A flop show of frustration by a desperate opposition

 


Upgrade Jharkhand News.  भले ही विश्व भर में संचार क्रांति का डंका बज रहा हो, किन्तु आभासी और वास्तविक स्थिति में जमीन आसमान का अंतर होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, यू ट्यूब चैनल्स में यदि अधिक शक्ति होती, तो वह मनमाने प्रचार से विश्व के अनेक देशों में सत्ता परिवर्तन करा देते तथा सस्ती लोकप्रियता के लिए यू ट्यूबर मन गढंत विमर्श प्रस्तुत करके सत्ता के लिए नित्य चुनौतियाँ खड़ी करते रहते, किन्तु ऐसा व्यवहार में भला कब होता है। आभासी जगत भले ही चंद लोगों के विचारों को लाइक करके करोड़ों की संख्या में फॉलोवर्स पैदा कर दे, किन्तु धरातल पर फॉलोवर्स कहीं नजर नहीं आते। विगत 6 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित किए गए प्रदर्शन के लिए भी सोशल मीडिया पर अत्यधिक प्रचार किए जाने पर भी पर्याप्त भीड़ नहीं जुट सकी तथा नीट पेपर के लीक होने का दोषी ठहराए जाने वाले शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र की मांग ने भी जोर नहीं पकड़ा, जिससे कि आंदोलन का बड़ा स्वरूप सरकार को गंभीर निर्णय लेने के लिए विवश करता। यह फ्लॉप प्रदर्शन अनेक राजनीतिक दलों के मिले जुले विमर्श तथा मात्र सत्ताधारी राजनीतिक दल तथा एक राष्ट्रवादी संगठन के विरोध तक सीमित रहा, जिससे इस प्रदर्शन की मंशा स्पष्ट हो गई, कि यह प्रदर्शन उन राजनीतिक दलों की हताशा और कुंठा का विषवमन है, जिन दलों को देश का जनमानस अस्वीकार कर चुका है। यूँ तो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, किन्तु जनसाधारण को भ्रमित करने का अधिकार प्रदान नहीं करता। 


वस्तुस्थिति यह है कि इस धरने प्रदर्शन का फ्लॉप होना यह दर्शाता है, कि इस मिशन का समर्थन करने वाले निराश व हताश राजनीतिक दलों के मंसूबे बार बार असफल हो रहे हैं। विदेशी धरती से भारत की व्यवस्था को ध्वस्त करने के प्रयासों को भारत की अधिसंख्य जनता स्वीकार नहीं करती, भले ही अराजक शक्तियां कितने ही मुखौटे बदल कर आएं। अराजक तत्वों के मंसूबे विफल होने पर यह समझना चाहिए, कि भारत का नागरिक आभासी दुनिया की कुत्सित चालों को समझ चुका है। उसे किसी भी प्रकार  विरोधी दुष्प्रचार से भ्रमित नहीं किया जा सकता।  डॉ. सुधाकर आशावादी



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