Jamshedpur (Nagendra) द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) , जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा 29 अगस्त 2026 को एसएनटीआई, जमशेदपुर में “जलवायु परिवर्तन के शमन में प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, अभियंताओं, उद्योग विशेषज्ञों तथा वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने तथा सतत समाधान विकसित करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विनीत कुमार साह, चीफ – लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं अध्यक्ष, IE(I), जमशेदपुर लोकल सेंटर ने स्वागत संबोधन दिया। अनूप श्रीवास्तव, चीफ एनवायरनमेंट, टाटा स्टील, जमशेदपुर ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अतिथियों का औपचारिक स्वागत डॉ. सीरम माधुरी, मानद सचिव, IE(I), जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा किया गया।
अपने स्वागत संबोधन में विनीत कुमार साह ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने नेपाल में हाल की चरम प्राकृतिक घटनाओं सहित विभिन्न पर्यावरणीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और उपयुक्त तकनीकी उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करने तथा तकनीकी नवाचारों को व्यावहारिक समाधान में परिवर्तित करने का यह उपयुक्त समय है।
मुख्य अतिथि अनूप श्रीवास्तव ने वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने तथा ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यावरण प्रबंधन, संसाधन अनुकूलन और जलवायु कार्रवाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑगमेंटेड AI तथा ChatGPT जैसी तकनीकों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन गंभीर चुनौतियां उत्पन्न करने के साथ-साथ नवाचार और सतत विकास के लिए नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। श्रीवास्तव ने सर्कुलर इकोनॉमी (परिपत्र अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने तथा अपशिष्ट पदार्थों के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों का कुशल उपयोग तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
तकनीकी सत्र पहले तकनीकी सत्र में डॉ. अनिल कुमार चौधरी, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, NIT जमशेदपुर ने “स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (Clean Water and Sanitation)” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने भूजल पुनर्भरण में कमी, बोरवेल के माध्यम से अत्यधिक भूजल दोहन तथा सिंचाई के लिए नदियों पर बढ़ती निर्भरता के कारण उत्पन्न जल संकट की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नदियों और महासागरों में अनुपचारित अपशिष्ट जल के कारण बढ़ते प्रदूषण पर भी चर्चा की। डॉ. चौधरी ने जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी प्रदूषण-नियंत्रण उपायों तथा प्रदूषण करने वाले उद्योगों के लिए उचित दंडात्मक प्रावधानों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल की मांग को कम करने, जन-जागरूकता बढ़ाने, जल-बचत उपकरणों को अपनाने, विकेंद्रीकृत जल पुनर्चक्रण प्रणालियों को बढ़ावा देने तथा पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े जलाशयों पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय कई छोटे जलग्रहण क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया। चिलिका झील के संरक्षण तथा राजस्थान की रूपारेल, बनगंगा और सरसा नदियों के पुनरुद्धार जैसे सफल उदाहरणों को जल संरक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता के प्रेरणादायक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। दूसरा तकनीकी व्याख्यान डॉ. सीरम माधुरी, एसोसिएट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, NIT जमशेदपुर द्वारा “ब्लू एनर्जी में प्रौद्योगिकी की भूमिका (Role of Technology on Blue Energy)” विषय पर दिया गया। उन्होंने समुद्र आधारित नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों तथा ऑफशोर संरचनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने पवन, तरंग, ज्वारीय तथा समुद्री तापीय ऊर्जा सहित विभिन्न समुद्री नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर चर्चा की। व्याख्यान में विंड-वेव-टाइडल हाइब्रिड प्रणालियों के लिए विकसित की जा रही तकनीकों, सहायक संरचनाओं तथा पावर टेक-ऑफ सिस्टम की भूमिका और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की उनकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
तीसरे तकनीकी सत्र में श्री शांति दास भट्टाचार्जी, सेवानिवृत्त चीफ (केमिकल एवं एनवायरनमेंट), टाटा पावर, जमशेदपुर ने “जल संरक्षण (Water Conservation)” विषय पर व्याख्यान दिया। पर्यावरण, सतत विकास एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर उन्होंने सतत ऊर्जा प्रक्रियाओं से संबंधित विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि थर्मल पावर प्लांट कुशल कूलिंग सिस्टम, Cycles of Concentration (CoC) में वृद्धि, अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण तथा Zero Liquid Discharge (ZLD) जैसी तकनीकों के माध्यम से जल की खपत को प्रभावी रूप से कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जल-संरक्षण उपाय बहुमूल्य मीठे जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ संसाधन दक्षता बढ़ाने, जलवायु-लचीलापन मजबूत करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक हैं। चौथा तकनीकी सत्र डॉ. आलोक कुमार रे, असिस्टेंट प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, NIT जमशेदपुर द्वारा “बायोवेस्ट से ऊर्जा (Biowaste to Energy)” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कृषि अवशेषों एवं पशु अपशिष्ट को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग कर विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न कृषि अवशेषों के प्रदर्शन की चर्चा करते हुए बताया कि विभिन्न अनुपातों में गोबर के साथ मिश्रित किए जाने पर मक्का अवशेष (Maize Residue) ने चावल और गेहूं के अवशेषों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। सत्र में बायोवेस्ट आधारित ऊर्जा प्रणालियों को सतत एवं परिपत्र ऊर्जा समाधानों के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। संगोष्ठी का समापन एक प्रश्नोत्तर सत्र, वैलेडिक्टरी कार्यक्रम तथा प्रतिभागियों के बीच प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ। प्रतिभागियों से भविष्य में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों के लिए सुझाव एवं प्रतिक्रिया भी प्राप्त की गई।
डॉ. सीरम माधुरी, मानद सचिव, IE(I), जमशेदपुर लोकल सेंटर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, सत्र अध्यक्ष, वक्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजन टीम तथा कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में 45 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें शिक्षा जगत, उद्योग एवं सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रतिभागियों में NIT जमशेदपुर के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी, शोधार्थी तथा टाटा स्टील, टाटा स्टील ग्रोथ शॉप, CSIR-NML, सुवर्णरेखा परियोजना, झारखंड सरकार सहित स्थानीय उद्योग एवं अन्य इंजीनियरिंग संगठनों के पेशेवर शामिल थे। सभी तकनीकी सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहे तथा प्रतिभागियों को जलवायु परिवर्तन के शमन, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, बायोवेस्ट से ऊर्जा उत्पादन तथा सतत संसाधन प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नवीन तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई। पूरे कार्यक्रम का समन्वय कृष्णेंदु शॉ, कार्यालय प्रभारी, IE(I), जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा किया गया।
संगोष्ठी का सफल आयोजन द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), जमशेदपुर लोकल सेंटर की ओर से पर्यावरण जागरूकता, तकनीकी नवाचार, सतत इंजीनियरिंग तथा जलवायु-लचीले विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।


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