इससे वे कार्य स्थल पर ड्यूटी करते थे। 30 अक्टूबर को गेटपास की समय सीमा समाप्त हो गयी है। किसी तरह 31 अक्टूबर को सीआईएसएफ ने कार्य स्थल पर जाने दिया, लेकिन एक नवम्बर से बिना गेटपास के सीआईएसएफ ने जाने से रोक दिया। सीआईएसएफ का कहना है कि अगर खदान के अंदर कोई दुर्घटना हो गयी तो उसके लिये जिम्मेदार कौन होगा। बिना गेटपास के आपको दुर्घटना के बाद कोई लाभ भी नहीं मिल पायेगा। मजदूरों ने कहा कि हमारा गेटपास जल्द बनाया जाये, ताकि हम अपने काम पर लौट सकें।
इस मामले में शांति कंस्ट्रक्शंस के मालिक संत प्रसाद तिवारी ने कहा कि 31 अक्टूबर की शाम सीजीएम व सतर्कता विभाग के अधिकारियों के साथ ठेकेदारों ने बैठक कर गेटपास संबंधी समस्या को रखा। हमने अपने मजदूरों का गेटपास बनाने के लिये भी दिया, लेकिन नहीं बनाया गया। आज जब मजदूर काम पर जा रहे थे तो उन्हें सीआईएसएफ ने खदान गेट के अंदर जाने नहीं दिया। इस मामले को लेकर आज पुनः सीआईएसएफ के उप कमांडेंट व प्रबंधन से इस मामले को लेकर बात करेंगे।

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