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Jamshedpur सीआईआई झारखंड चैप्टर का एमएसएमई ग्रोथ समिट का भव्य आयोजन CII Jharkhand Chapter organised a grand MSME Growth Summit.

 


Jamshedpur (Nagendra) भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने जमशेदपुर में “CII झारखंड एमएसएमई ग्रोथ समिट” का आयोजन किया, जिसका मुख्य विषय था “व्यवसाय विकास एवं स्थिरता के लिए एमएसएमई आउटरीच को अधिकतम करना”। इस शिखर सम्मेलन में उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं, नीति-निर्माताओं और एमएसएमई प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा क्षेत्र के समक्ष उभरते अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन से प्राप्त चर्चाएं, अंतर्दृष्टि और नेटवर्किंग अवसरों के ठोस साझेदारियों एवं क्रियान्वयन योग्य परिणामों में बदलने की अपेक्षा है, जिससे झारखंड के एमएसएमई इकोसिस्टम को और सुदृढ़ किया जा सकेगा तथा दीर्घकालिक, सुदृढ़ औद्योगिक विकास में इसकी भूमिका और मजबूत होगी। इस  समिट में अखिल जैन, सीनियर डिविजनल मटेरियल्स मैनेजर, चक्रधरपुर, दक्षिण पूर्व रेलवे ने भारतीय रेल की खरीद प्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी और इसकी पूर्णतः डिजिटलीकृत प्रकृति को रेखांकित किया।


उन्होंने विद्युत उपकरणों जैसे सामान्य उपयोग की वस्तुओं के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल की भूमिका स्पष्ट की, वहीं विशेष रेलवे उपकरणों तथा मूल्य की परवाह किए बिना सभी टेंडरों के लिए इंडियन रेलवे ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (IREPS) को समर्पित प्लेटफॉर्म के रूप में बताया। श्री जैन ने खरीद चक्र की भी जानकारी दी, जिसमें रणनीतिक स्तर पर मुख्यालय आधारित खरीद और सामरिक स्तर पर मंडलीय खरीद के साथ-साथ आपातकालीन एवं गैप-फिलिंग खरीद शामिल हैं, जिनमें त्वरित प्रक्रिया और डिलीवरी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि रेलवे की खरीद प्रक्रिया छोटे मूल्य की वस्तुओं से लेकर उच्च मूल्य के अनुबंधों तक विस्तृत है और यह रेखांकित किया कि भारतीय रेल ने 100 प्रतिशत डिजिटल खरीद हासिल कर ली है, जिससे एमएसएमई विक्रेताओं के लिए पारदर्शी और सुलभ अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। वहीं अभिजीत ए. नानोटी, चेयरमैन, CII जमशेदपुर जोनल काउंसिल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, जमशेदपुर कंटीन्यूअस एनीलिंग एंड प्रोसेसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि भारत का एमएसएमई क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां भविष्य की वृद्धि क्षमता, एकीकरण और तैयारी पर निर्भर करेगी। 


एमएसएमई को प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार और लचीलापन के प्रमुख चालक के रूप में पहचानते हुए, CII झारखंड उन्हें घरेलू और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। व्यावसायिकरण, डिजिटल अपनाने, गुणवत्ता प्रणालियों और स्थिरता पर स्पष्ट जोर के साथ, एमएसएमई को संरचित क्षमता निर्माण पहलों, उद्योग संपर्कों और नीति-स्तरीय सहयोग के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। ध्यान लागत-आधारित प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर मूल्य-आधारित साझेदारियों की ओर है, जिसमें उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और पारदर्शी प्रशासन को अपनाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जैसे-जैसे उद्योग की अपेक्षाएं विश्वसनीयता, विस्तार क्षमता और सतत संचालन की ओर बढ़ रही हैं, कौशल, प्रौद्योगिकी और अनुपालन में निवेश करने वाले एमएसएमई के बड़े उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत होने की उम्मीद है, जिससे वे भारत की वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में दीर्घकालिक योगदानकर्ता बन सकें। वहीं राजीव बंसल, कन्वीनर, CII झारखंड एमएसएमई पैनल एवं हेड – सप्लाई चेन, टाटा मोटर्स लिमिटेड ने कहा कि भारत का एमएसएमई क्षेत्र आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। 


यह जीडीपी, निर्यात और विनिर्माण उत्पादन में उल्लेखनीय योगदान देता है और कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। उद्यम पंजीकरण (उद्यम) प्लेटफॉर्म पर 6.82 करोड़ से अधिक इकाइयों के पंजीकरण और लगभग 30 करोड़ लोगों के रोजगार के साथ, एमएसएमई भारत सरकार की परिकल्पना के अनुसार वित्त वर्ष 2030 तक अर्थव्यवस्था को 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का केंद्र हैं। हालिया नीतिगत उपाय, जिनमें बेहतर ऋण पहुंच, उद्यमिता समर्थन, सार्वजनिक खरीद सुधार तथा उद्यम पंजीकरण, पीएम विश्वकर्मा, पीएमईजीपी और केंद्रीय बजट 2025–26 में उल्लिखित स्वच्छ प्रौद्योगिकी मिशन जैसी पहलें शामिल हैं, इस क्षेत्र को सशक्त बनाने की व्यापक रणनीति को दर्शाती हैं। आत्मनिर्भर रेलवे, खरीद अवसर और सप्लाई-चेन एकीकरण के माध्यम से एमएसएमई को बदलते खरीद पारिस्थितिकी तंत्र की समझ, प्रतिस्पर्धात्मकता और आपूर्ति तत्परता बढ़ाने तथा डिजिटल और प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि स्केलेबल, सतत विकास और सार्थक राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा मिल सके। समिट में तापस साहू, पूर्व चेयरमैन, CII झारखंड स्टेट काउंसिल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, हाईको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड ने एमएसएमई की वृद्धि को गति देने के लिए उत्पादन क्षमताओं और आपूर्ति श्रृंखला तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि लेन-देन आधारित मॉडल से दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों की ओर स्पष्ट बदलाव हो रहा है। 


डिजिटल परिपक्वता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन, प्रौद्योगिकी, डिजिटल भुगतान और ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म का त्वरित अपनाना अब एमएसएमई के लिए प्रतिस्पर्धी बने रहने हेतु अनिवार्य हो गया है। उन्होंने टाटा समूह जैसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के साथ सहयोग का उल्लेख किया और कौशल व प्रौद्योगिकी के अनुरूप क्लस्टर-आधारित विकास की वकालत की, जिससे झारखंड को एक उच्च-प्रभाव वाला एमएसएमई विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके। श्री साहू ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसी सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया, जो शैक्षणिक संस्थानों और एमएसएमई के बीच सहयोग के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देती हैं तथा पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं और सामग्रियों के विकास के लिए पर्याप्त वित्त पोषण उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक एमएसएमई सहयोग भारत की वृद्धि के लिए समयोचित अवसर प्रदान करते हैं। वहीं राजीव शुक्ला, सह-कन्वीनर, CII झारखंड एमएसएमई पैनल एवं पार्टनर, हिमालय एंटरप्राइजेज ने CII झारखंड द्वारा एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों पर प्रकाश डाला और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सहयोग और समर्थन का आह्वान किया। उन्होंने एमएसएमई को भारत की वृद्धि का वास्तविक इंजन बताया, जो आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण, रोजगार सृजक और सामाजिक रूप से उत्तरदायी हैं।


उन्होंने कहा कि बदलता हुआ एमएसएमई परिदृश्य सरल नियमों, बेहतर ऋण पहुंच और नवाचार को बढ़ावा देने के मजबूत प्रयासों के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में उन्नत डिजिटल समाधानों और अनुसंधान एवं विकास को अधिक अपनाया जाएगा, जिससे एमएसएमई और नई पीढ़ी के उपकरणों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी। उन्होंने भारत के वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ते आकर्षण का भी उल्लेख किया, जिससे एमएसएमई को बड़ी कंपनियों के लिए सहायक उत्पादों और सेवाओं की आपूर्ति करने वाले चुस्त और अनुकूलनशील भागीदार बनने के नए अवसर मिलेंगे। सत्र के दौरान अपने विचार साझा करने वाले प्रतिष्ठित वक्ताओं में  दिब्यांशु सिन्हा, सदस्य, CII झारखंड स्टेट काउंसिल एवं डायरेक्टर, नालिन रबर प्राइवेट लिमिटेड , सुरेंद्र कुमार, असिस्टेंट मटेरियल्स मैनेजर, ईएलएसएस, टाटा नगर;  रोहित गोयल, सह-कन्वीनर, CII झारखंड एमएसएमई पैनल एवं डायरेक्टर, आईईएमसीओ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड;  सौगत महांति, काउंसलर, CII गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर; पोनराज पांडियन, हेड ऑफ प्रोग्राम पर्चेजिंग एंड मटेरियल मैनेजमेंट, रीजन इंडिया, जेडएफ कमर्शियल व्हीकल सॉल्यूशंस; बिस्वजीत जेना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, आरएसबी ट्रांसमिशंस (इंडिया) लिमिटेड तथा आशीष गेरा, सीनियर जनरल मैनेजर, सप्लाई चेन, टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे।


सीआईआई (CII) झारखंड एमएसएमई ग्रोथ समिट का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ, जिसमें 120 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों, जिनमें एमएसएमई के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर शामिल थे, ने भाग लिया। यह सम्मेलन संवाद, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरा। वरिष्ठ उद्योग नेताओं की सक्रिय भागीदारी ने भारत की आर्थिक संरचना में एमएसएमई के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया और नवाचार, स्थिरता तथा समावेशी विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित किया। सम्मेलन में आत्मनिर्भर रेलवे ढांचे के तहत रेलवे आपूर्ति श्रृंखलाओं में एमएसएमई के एकीकरण के अवसरों पर प्रकाश डाला गया, साथ ही अनुपालन और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण प्रथाओं पर जोर देते हुए हरित एवं सतत विकास मार्गों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। व्यवसाय और खरीद अवसरों पर हुई चर्चाओं में बाजार पहुंच बढ़ाने, साझेदारियों को मजबूत करने और खरीद संबंधों को गहरा करने की रणनीतियों पर विचार किया गया, जिससे समावेशी और सतत आर्थिक विकास के प्रमुख चालक के रूप में एमएसएमई की भूमिका और सुदृढ़ हुई।



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