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Jamshedpur झारखण्ड सांस्कृतिक कला रंग मंच का भुइयां डीह में आयोजित विराट टुसू मेला में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास व सांसद विद्युत महतो शिरकत किए Former Chief Minister Raghuvar Das and MP Vidyut Mahato participated in the grand Tusu fair organised by Jharkhand Cultural Art Rang Manch at Bhuiyan Deeh.

 


Jamshedpur (Nagendra) भुइयांडीह दुर्गापूजा मैदान में झारखंड सांस्कृतिक कला रंग मंच द्वारा आयोजित 14जनवरी से 16जनवरी तक तीन दिवसीय टुसू मेला के अंतिम दिन समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं सम्मानित अतिथियों में सांसद विद्युत वरन महतो,  पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया, बलदेव भुइयां, झामुमो नेता हरि मुखी , झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता बिप्लब भुइंया , अंजनी भुइंया सहित कई अन्य गणमान्य लोग मंच पर उपस्थित रहे। टुसू मेला का शुभारंभ 14 जनवरी को पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया के पिताश्री राम प्रसाद भुइंया जी के हाथों स्वर्णरेखा नदी टुसू घाट पर विधिवत रूप से किया गया था। वहीं शुक्रवार,16 जनवरी को भुइयां डीह दुर्गा पूजा मैदान में टुसू मेला का भव्य रूप से समापन किया गया। 


इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेले में इतनी भीड़ उमड़ी की मैदान में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। इसमें दर्जनों टुसू प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। मेले में संजय महतो (खाड़ियाडीह गालूडीह) की टीम को प्रथम पुरस्कार मिला। इसी तरह द्वितीय पुरस्कार बाबूराम भुइयां (जामबनी बोड़ाम पटमदा) को मिला एवं तृतीय पुरस्कार कार्तिक भुइयां (पुनसा पागदा बोडाम) को दिया गया। सभी विजेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं सांसद विद्युतवरण महतो तथा पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया ने अपने हाथों से पुरस्कृत कर हौसला अफजाई किया और उन्हें अगले साल के लिए भी आमंत्रण दिया।


टुसू मेला के समापन पर पूर्व सीएम रघुवर दास ,सांसद विद्युत वरन महतो एवं मंत्री दुलाल भुइंया ने ढोल नगाड़े बजाकर पारंपरिक संस्कृति की रंग में झूमते दिखे। झारखंड की लोकसंस्कृति के महान पर्व दुसु मेले में आसपास के क्षेत्रों से आये कई टुसू दल और नाच दल पारंपरिक वेशभूषा में गाजे बाजे के साथ शामिल हुए। वहीं समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि टूसु पर्व झारखंड की लोक आस्था, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सशक्त प्रतीक है। यह पर्व आपसी भाईचारे, सौहार्द और सामाजिक समरसता को मजबूत करता है। 


ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक परंपराओं को पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने माँ टूसु से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। सांसद विद्युत वरन महतो ने कहा कि टुसू पर्व झारखंड संस्कृति की पहचान है। इसी दिन सूर्य देवता का उत्तरायण होता है। जो कृषि के लिए उपकारी होता है। कुड़माली संस्कृति में इसे आखाईन यात्रा कहा जाता हैं। आज के दिन किसान अपने खेत में हल चलाते हैं। यह दिन किसानों के लिए नववर्ष का प्रथम दिन है। 


लोग नए नए परिधान पहन कर टुसू पर्व मनाते हैं। माघ मास में रिश्तेदारों के वहां पिठा पहुंचनें का रिवाज है। शादी जैसे शुभ कार्यों का प्रारंभ भी इसी महीने से होता है। फसल की कटाई के बाद मकर पर्व और खेती की शुरुआत की जाती है। वहीं पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया ने कहा कि इस दुर्गा पूजा मैदान भुइयांडीह में पिछले 40 वर्षों से यहां टुसू मेला लगाया जा रहा है , इससे पहले स्वर्णरेखा नदी टुसू घाट पर टुसू मेला लगाया जाता था और आज भी टुसू मेला का शुभारंभ 14 जनवरी को टुसू घाट पर ही हर वर्ष किया जाता है। उन्होंने कहा कि टुसू पर्व से ही नए साल की शुरुआत होती है।


झारखंड में जिस तरह टुसू पर्व मनाया जाता है , इसी तरह देश के अलग अलग राज्यों में भी अलग अलग नाम से कहीं मकर संक्रांति, गुड़ पीठा ,पोंगल, लोहड़ी, दही चूड़ा तिल आदि कई रूपों में मनाया जाता है। टुसू मेला को सफल बनाने में मुख्य रूप से निमाई मंडल ,शंम्भू महतो, निरंजन भुईयाँ,  गणेश मुईयाँ, बादल भुईयों, बाने भुईयों, सुनील दारा, संतोष लोहार, हीरालाल दास,  चेतन चौसा मुखी,  डॉ. विजय महतो सहित समस्त भुइंया समाज, बाउट समाज, कालिन्दी समाज, तुरी समाज, रविदास समाज , आदिवासी उराँव समाज, आधिवासी हो समाज, आदिवाशी संथाल समाज, भुमिज समाज, कोईरी समाज, कुम्हार समाज , तेली समाज, कर्मकार समाज, नाई समाज सहित अन्य सामाजिक संगठन के लोग उपस्थित रहे और सार्थक भूमिका निभाये।



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