Upgrade Jharkhand News. हिंदी साहित्य में शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रस्वाभिमान को ओजस्वी स्वर देने वाले प्रख्यात कवि पंडित श्याम नारायण पाण्डेय की पुण्यतिथि पर आज देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। ‘हल्दीघाटी’ जैसी कालजयी रचना के माध्यम से उन्होंने पीढ़ियों को वीरता और बलिदान का संदेश दिया। 1910 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के ग्राम डुमरांव में जन्मे पंडित श्याम नारायण पाण्डेय का जीवन संघर्ष और साधना का प्रतीक रहा। प्रारंभिक जीवन में ही पिता के निधन के बाद उन्होंने संस्कृत और हिंदी साहित्य में गहन अध्ययन किया और काशी स्थित माधव संस्कृत महाविद्यालय में आचार्य पद पर नियुक्त हुए।
युवावस्था में वे देश के प्रमुख कवि सम्मेलनों के शीर्षस्थ कवि रहे। उनकी ओजस्वी कविताएँ सुनने के लिए श्रोता दूर-दराज़ से आते थे। 1939 में रचित उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हल्दीघाटी’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही और राष्ट्रचेतना का प्रतीक बनी। जौहर, तुमुल, जय हनुमान, भगवान परशुराम, शिवाजी, माधव, रिमझिम और आरती जैसे उनके काव्यग्रंथ वीर रस साहित्य की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनकी लेखनी में युद्धभूमि का चित्रण इतना सजीव है कि शब्द स्वयं शस्त्र बन जाते हैं।
पंडित पाण्डेय की पहचान उनकी निर्भीकता रही। उन्होंने कभी सत्ता की चापलूसी नहीं की और वीरों के बलिदान स्थलों को ही सच्चा तीर्थ माना। घोर आर्थिक अभावों के बीच 27 जनवरी 1989 को उनका निधन हुआ, किंतु उनका काव्य आज भी राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की चेतना को जीवित रखे हुए है। हालाँकि समय के साथ उनकी कुछ ओजस्वी रचनाओं को पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया, लेकिन जनमानस में उनका स्थान आज भी अटल और अमिट बना हुआ है।




































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