Jamshedpur (Nagendra) सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन एवं छंदमाल्य कवि मण्डपम् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छंदबद्ध रचनाओं की गीतमय प्रस्तुतियों के साथ छंदमाल्य भाग - 7 का आयोजन तुलसी भवन के मानस सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता धनबाद से आई छंदाचार्य ममता बनर्जी ने की। मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में राँची से पधारे डाॅo जंगबहादुर पांडेय, जबकि विशिष्ट अतिथि डाॅo प्रसेनजीत तिवारी, विद्यासागर लाभ तथा सुभाषचंद्र मुनका उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं साधकों द्वारा सरस्वती वंदना के साथ किया गया। छंदों का यह अद्भुत कार्यक्रम कुछ इस तरह से नियोजित किया गया था कि जिसमें किसी भी वाक्य को गद्य में उच्चारित नहीं किया गया , अतिथियों के स्वागत, मंच पर आमंत्रण, आभार, संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन तक के कार्यों को केवल छंदों में किया गया। यहां तक की समीक्षात्मक टिप्पणियां भी छंदों में की गई।
वर्तमान में जहाँ छंदों का स्थान फूहड़ता युक्त कविताओं और चुटकुलों ने ले लिया है वहीं शहर की छंदज्ञ प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम' ने शहर के प्रतिभाशाली कवियों को छंदज्ञान से परिपूर्ण करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने बताया कि आज जमशेदपुर के अधिकांश कवि कवयित्री छंद की जानकारी रखते हैं और मंचों पर छंद की प्रस्तुति देने लगे हैं । छंदमाल्य के छह भाग पहले ही सफलता के साथ संपन्न हो चुके है। सातवें भाग में भारत की अजेय वीरांगनाएँ की गाथा चौपाई व दोहा में गाकर अदभुत शमा बँध गया।
कार्यक्रम की चिंतक व संयोजिका प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम' ने बताया कि "उनकी इस अनोखे छंद आधारित कार्यक्रम की परिकल्पना को साकार करने का बीड़ा नगर कुशल छंद साधकों ने उठाया । पुस्तक में इक्कीस प्रतिभागियों के साथ पाँच छंदगुरु का सहयोग प्राप्त हुआ। प्रथम सत्र के उद्घाटन में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया और कार्यक्रम का छंद में संचालन करते हुए मनीषा सहाय व रजनी रंजन ने छंदो में धारा प्रवाह संचालन किया ,गणेश वंदना पद्मा प्रसाद ,सरस्वती वंदना रजनी रंजन, स्वागत उदबोद्धन तुलसी भवन मानद महासचिव डाॅo प्रसेनजित तिवारी ने किया। छंदमाल्य चिंतक प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम' के उद्बोधन के बाद छंदमाल्य सप्तऋषि ,अजेय वीरांगनाएँ पुस्तक का लोकार्पण हुआ। जिसमें सभी इक्कीस प्रतिभागियों द्वारा लिखित चौपाई व दोहा में भारत की यशस्वी वीरांगनाओं की गाथा संकलित हैं।
सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों के बाद सम्मानित किया गया। प्रस्तुति के बाद उनकी समीक्षा अध्यक्षता कर रहीं छंदज्ञ ममता बनर्जी द्वारा की गई। दूसरे सत्र में सर्वप्रथम कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों ने अपना वक्तव्य दिया तथा इस कार्यक्रम के प्रति अपने दृष्टिकोण को रखा सभी ने इस कार्यक्रम को अनोखा,अद्वितीय और अतुलनीय बताया । तदनुपरांत अतिथियों के द्वारा छंदमाल्य के सभी प्रतिभागियों को अंगवस्त्र ,स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के तीसरे सत्र में नगर के जाने माने कवि , छंदज्ञ एवं नवोदित रचनाकारों ने अपनी छंद काव्य पाठ प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। अंत में छंदमाल्य परिवार की तरफ से धन्यवाद ज्ञापन रीना सिन्हा सलोनी द्वारा किया गया।

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