Jamshedpur (Nagendra) बिष्टुपुर तुलसी भवन में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक रसिया बाबा ने व्यासपीठ से धु्रव चरित्र, ऋषभ देव चरित्र, जड़ भरत, अजामिल, प्रहलाद चरित्र की कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाया। इसका आयोजन शारणागति परिवार, जमशेदपुर द्धारा किया जा रहा हैं। कथावाचक ने कहा कि भागवत कथा के ये चरित्र हमें भक्ति, वैराग्य और ईश्वर-विश्वास का मार्ग दिखाते हैं, जहाँ धु्रव ने तपस्या से, जड़ भरत ने वैराग्य से, और प्रहलाद ने अटूट भक्ति से मोक्ष पाया, जबकि अजामिल ने अंत समय में नाम स्मरण से उद्धार पाया; ये सभी कथाएँ जीवन में धर्म और सत्य के पालन का महत्व बताती हैं।
कथावाचक ने प्रह्लाद चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रह्लाद की अटूट भक्ति, धर्म और अधर्म के बीच के संघर्ष और अंततः भगवान नरसिंह के अवतार का वर्णन करता है, जहाँ प्रह्लाद के पिता द्वारा अनेकों यातनाएँ देने के बाद भी उनकी भक्ति डिगती नहीं, और भगवान उन्हें बचाने के लिए खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का वध करते हैं, जो भक्ति की शक्ति और ईश्वर के संरक्षण को दर्शाता है। कथावाचक ने कहा कि अजामिल की कथा भागवत पुराण की एक प्रसिद्ध कथा है जो बताती है कि एक पापी व्यक्ति भी भगवान के नाम के स्मरण से मोक्ष पा सकता है। धु्रव चरित्र की कथा भी भगवान की अटूट भक्ति और तपस्या की प्रेरणादायक कहानी है। धु्रव ने कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया, जिससे उन्हें धु्रव तारे के रूप में अमर स्थान और संसार में राजपद प्राप्त हुआ, जो अटूट निष्ठा और एकाग्रता का प्रतीक है। जड़भरत की कहानी राजा भरत के तीन जन्मों का वर्णन करती है।
भगवान ऋषभदेव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और विष्णु के अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने अहिंसा, संयम व तप से आदर्श जीवन का संदेश दिया। इन सभी कथाओं के माध्यम से उन्होंने जीवन का महत्व समझाया। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा। आज के मुख्य यजमान उषा-ब्रिज मोहन बागड़ी, रीता-राजेश गढ़वाल, शिशिर, नथमल शर्मा, रूपा-विष्णु अग्रवाल थे। कथा के चौथे दिन रविवार को गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, श्री वामन चरित्र, ज्ञर राम अवतार, श्री कृष्ण जन्मोत्सव आदि प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी।


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