केंद्रीय बजट 2026-2027
Upgrade Jharkhand News. मध्यप्रदेश की राजनीति लंबे समय से “केंद्र से क्या मिला” के सवाल में उलझी रही है, लेकिन बजट 2026-27 ने बहस की दिशा ही बदल दी है। अब मुद्दा हिस्सेदारी का नहीं, भूमिका का है। सवाल यह नहीं है कि राज्य को कितना पैसा मिला, बल्कि यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय विकास रणनीति में मध्यप्रदेश को किस तरह की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बजट में मध्यप्रदेश को मांगने वाले राज्य की तरह नहीं, बल्कि शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के प्रयोग स्थल की तरह देखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए यह बजट साधारण आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि डबल इंजन सरकार की राजनीतिक विश्वसनीयता की परीक्षा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों को सिटी इकॉनमिक रीजन बनाना, राजधानी भोपाल को यूनिवर्सिटी टाउनशिप और मेट्रो विस्तार से जोड़ना, जिलों में स्वास्थ्य और महिला केंद्रित ढांचे को मजबूत करना,ये सभी फैसले संकेत दे रहे हैं कि अब केंद्र और राज्य का तालमेल नारों में नहीं, शहरों की बनावट और ज़मीनी फैसलों में दिखाने की कोशिश हो रही है। मध्यप्रदेश इस बजट में पहली बार उपेक्षा की शिकायत करता राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास एजेंडे का सक्रिय मोहरा बनकर उभरा है।
डबल इंजन की स्पष्ट छाप - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में मध्यप्रदेश सरकार, यह संयोग नहीं, बल्कि नीति और नीयत का ऐसा मेल है, जिसमें विकास को जमीन पर उतारने की स्पष्ट मंशा दिखाई देती है। बजट 2026-27 को मध्यप्रदेश और उसके शहरों के संदर्भ में देखा जाए, तो यह साफ होता है कि केंद्र और राज्य के बीच डबल इंजन की अवधारणा अब केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरी विकास, निवेश और आर्थिक विस्तार की ठोस रणनीति में बदल चुकी है। यह बजट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की पहचान केवल कृषि प्रधान राज्य के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से उभरते शहरी और आर्थिक केंद्रों के राज्य के रूप में स्थापित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे शहर इस रणनीति के केंद्र में हैं। जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, तकनीक और रोजगार एक साथ आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यभार संभालने के बाद जिस ‘निवेश, नवाचार और नगरीय विकास’ की बात कही थी, बजट 2026-27 उस सोच को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन देता नजर आता है।
शहरों को नई पहचान - भारत के विकास मॉडल में लंबे समय तक शहरों को केवल प्रशासनिक या जनसंख्या दबाव वाले क्षेत्रों के रूप में देखा गया लेकिन बजट 2026-27 से अब शहरों को विकास की धुरी के रूप में स्थापित किया जा रहा है। सिटी इकॉनमिक रीजन की अवधारणा इस बदलाव का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। इसके तहत भोपाल जैसे शहरों को केंद्र में रखकर आसपास के औद्योगिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को एक साझा आर्थिक इकाई में बदला जाएगा। यह मॉडल मध्यप्रदेश को केवल उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि उत्पादन और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की क्षमता रखता है। इंदौर, जो पहले ही व्यापार और स्टार्टअप संस्कृति के लिए जाना जाता है, इस ढांचे में राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सकता है। वहीं भोपाल जैसे शहर प्रशासनिक राजधानी से आगे बढ़कर आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।
म्युनिसिपल बॉन्ड - शहरी आत्मनिर्भरता की मजबूत बुनियाद बनाने की दिशा में बजट 2026-27 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है नगरीय निकायों को म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए संसाधन जुटाने के लिए प्रोत्साहन। यह व्यवस्था शहरी विकास को अनुदान आधारित मॉडल से आत्मनिर्भर मॉडल की ओर ले जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे नगर निगम अब केवल सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी योजनाओं और विश्वसनीयता के बल पर पूंजी बाजार से संसाधन जुटा सकेंगे। केंद्र सरकार द्वारा बड़े बॉन्ड इश्यू पर प्रोत्साहन देना यह दर्शाता है कि शहरी विकास में अब पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। यह बदलाव नगर निगमों की कार्यसंस्कृति में भी सुधार ला सकता है और विकास परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने में मददगार साबित होगा।
विकास की रफ्तार को मजबूती - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीति में इंफ्रास्ट्रक्चर को हमेशा केंद्रीय स्थान मिला है। बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय पर दिया गया जोर इसी नीति की निरंतरता है। इसका सीधा लाभ मध्यप्रदेश के शहरों को मिलने वाला है। बेहतर सड़कें, मेट्रो परियोजनाएं, जल आपूर्ति, सीवरेज और शहरी आवास। ये सभी पहलू शहरों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ-साथ निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं। भोपाल-इंदौर मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि पूरे शहरी परिदृश्य को नया आकार देने वाले साबित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ बताने की सोच, इस बजट में स्पष्ट रूप से झलकती है।
टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स - बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग पर दिया गया जोर मध्यप्रदेश के लिए दूरगामी असर वाला है। विशेष रूप से भोपाल जैसे शहर, जहां उच्च शिक्षा और मानव संसाधन की मजबूत उपस्थिति है, इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार से भोपाल की पहचान केवल प्रशासनिक केंद्र तक सीमित नहीं रहेगी। यह शहर आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और नवाचार का केंद्र बन सकता है, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कृषि राज्य से शहरी अर्थव्यवस्था की ओर संतुलित कदम - मध्यप्रदेश की ताकत उसकी कृषि है और बजट 2026-27 इस ताकत को शहरी अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाता है। तकनीक आधारित कृषि, रिसर्च और वैल्यू एडिशन पर जोर देकर यह सुनिश्चित किया गया है कि किसान और शहर दोनों एक-दूसरे से लाभान्वित हों। शहरों के आसपास एग्री-प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक सुविधाओं का विकास ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच मजबूत सेतु का काम करेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा।
राज्यों और केंद्र के समन्वय से शहरी भविष्य - बजट 2026-27 में यह स्पष्ट झलक मिलती है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर शहरी विकास को नई दिशा देना चाहती हैं,इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय विकास दृष्टि और मुख्यमंत्री मोहन यादव की राज्य केंद्रित प्राथमिकताएं जब एक साथ आगे बढ़ेगीं , तो उसका असर नीति से लेकर ज़मीन तक दिखाई देगा। डबल इंजन सरकार का लाभ तभी पूरी तरह सामने आता है, जब योजनाएं शहरों की सड़कों, उद्योगों और रोजगार के अवसरों में बदलती हैं। इस बजट ने उस रास्ते को साफ किया है। केंद्रीय बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए एक ऐसे दौर की शुरुआत का संकेत देता है, जहां शहर विकास के बोझ नहीं, बल्कि विकास के वाहक होंगे। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर अब केवल राज्य की पहचान नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत बनते दिखाई देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की नीतियां और मुख्यमंत्री मोहन यादव की राज्य स्तरीय सक्रियता यदि इसी तालमेल के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो मध्यप्रदेश का ग्रामीण और शहरी परिदृश्य आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदला हुआ नजर आ सकता है। जहां निवेश, रोजगार और बेहतर जीवन गुणवत्ता एक साथ आगे बढ़ते दिखाई देगें और तब मध्यप्रदेश एक मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले राज्य के रुप में दिखाई देगा। पवन वर्मा




































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