Upgrade Jharkhand News. आज हम नमन करते हैं एक ऐसे वीर सपूत को, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अपने अदम्य साहस और देशभक्ति का परिचय दिया। 77 वर्ष की आयु में हमसे विदा लेने वाले युद्धवीर घनश्याम सिंह प्रसाद कदम जी का जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा का प्रतीक रहा। 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में उन्होंने जो शौर्य और पराक्रम दिखाया, वह आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। रणभूमि में उनकी वीरता ने न केवल राष्ट्र की रक्षा की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।युद्ध के बाद भी उन्होंने अपने जीवन को सम्मान, अनुशासन और सेवाभाव से जिया। एक सैनिक के रूप में उनका योगदान अविस्मरणीय है, और एक व्यक्ति के रूप में उनका चरित्र अनुकरणीय।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनकी स्मृतियां, उनके आदर्श और उनकी वीरगाथा हमेशा हमारे हृदयों में जीवित रहेंगी। उनके परिवार के प्रति हम गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि राष्ट्र सदैव अपने इस वीर सपूत को याद रखेगा। कदमा निवासी नायक घनश्याम प्रसाद सिंह बताते हैं कि सिग्नल कोर के सिपाही के नाते युद्ध के आधिकारिक घोषणा के पहले ही कई प्रकार की तैयारियां शुरू कर ली गयी थी. उन्हें 33 कोर के साथ मिलकर गुप्त सूचनाएं एकत्रित करने की जिम्मेवारी मिली थी. यह कार्य मई माह से ही शुरू हुआ. उनकी ड्यूटी में मुक्तिवाहिनी के सैनिकों के साथ सामंजस्य बैठाकर पूरी रात क्षेत्रों का भ्रमण कर फौजी गाड़ी, पाकिस्तानी तैयारियों तथा उनके सिग्नल को इंटरसेप्ट करना ऐसी तमाम जानकारियां एकत्रित की जाती थी. इसके बाद सारी रिपोर्ट दिन चढ़ने से पहले ही 33 कोर को भेज दी जाती थी. नायक घनश्याम बताते हैं कि वे भी बंगलादेशी नागरिकों की तरह दिन भर लूंगी-टी शर्ट पहनकर ही हर दिन अलग-अलग घरों में छिपे रहते थे. उन्हें बांग्लाभाषा नहीं आती थी. दिन में पहचान छिपाने की हर तरकीब अपना कर पूरी रात जासूस बनकर सूचनाएं एकत्र करना भी लड़ाई का अहम हिस्सा था. दिसंबर में युद्ध के मध्य में ही उन्हें भारत भूटान सीमा पर विशेष कार्यवश पोस्टिंग भेजी गयी. नायक घनश्याम सिंह पटना में 22 फरवरी 1967 में सेना के सिग्नल कोर में भरती हुए थे. उन्हें ईस्टर्न स्टार, संग्राम और विदेश सेवा मेडल से सम्मानित किया गया.
1971 के वीर और हमारे संगठन के सक्रिय सदस् घनश्याम प्रसाद सिंह के आकस्मिक निधन से हमारे संगठन को अपूरणीय क्षति हुई है | अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर के सदस्यों द्ववारा नम आंखों से उन्हें विदाई दी। मौके पर संगठन नरसिंह सिंह ने कहा उनका आकस्मिक चला जाना संगठन के लिए बहुत बड़ी छती है। 1971 के वीर और हमारे संगठन के सक्रिय सदस्य केशव कुमार सिंह के आकस्मिक निधन से हमारे संगठन को अपूरणीय क्षति हुई है | अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर के सदस्यों द्ववारा नम आंखों से उन्हें विदाई दी। मौके पर संगठन नरसिंह सिंह परशुराम सिंह ओ पी प्रसाद वरुण कुमार DN सिंह राकेश चौधरी ने कहा उनका आकस्मिक चला जाना संगठन के लिए बहुत बड़ी छती है।

.jpeg)




































No comments:
Post a Comment