- गोलमुरी में भागवत कथा में सुदामा-कृष्ण मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुन भाव विभोर हुए भक्त ।
Jamshedpur (Nagendra) गोलमुरी मनिंदर टावर में चल रहे भागवत कथा के सातवें दिन बुधवार को आचार्य पंडित सुरेश चन्द्र शास़्त्री जी महाराज ने सुदामा चरित्र, कुरूक्षेत्र लीला, श्री कृष्ण उद्धव संवाद, भगवत कथा सार, कथा विश्राम का वर्णन किया। कृष्ण और सुदामा की मित्रता की महिमा का गुणगान करते हुए आचार्य ने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। मित्रता को सर्वाेपरि मानते हुए सुदामा ने भगवान के पास होते हुए भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा। अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। लेकिन कृष्ण ने बिना कहे ही उनकी दरिद्रता दूर कर दी और उन्हें धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। कहा कि अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है! मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे, जो कि मित्र की गलती पर उसे रोके और सही राह पर उसका सहयोग दे। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची मित्रता में भौतिक संपत्ति का कोई महत्व नहीं है, और भगवान केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं।
उन्होंने कुरूक्षेत्र लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह लीला सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने धर्म और कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। श्री कृष्ण उद्धव संवाद के वर्णन में बताया कि यह संवाद सिखाता है कि ईश्वर प्रेम और शरणागति के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं, केवल ज्ञान या तपस्या से नहीं। आचार्य ने कथा विश्राम का वर्णन में कहा कि भागवत कथा का विश्राम आत्मा को परमात्मा से जोड़कर, जीवन जीने की सही दिशा दिखाने वाली एक भक्तिमय प्रक्रिया है। इस पावन प्रसंग के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। कथा के बीच-बीच में भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। आठवें दिन गुरूवार 26 फरवरी को सुबह प्रातः 9 बजे से हवन और शाम 5 बजे से फूलों की होली होगी। यह आठ दिवसीय आयोजन गोलमुरी के चम्पा-रतन अग्रवाल (गोयल परिवार) द्धारा अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर किया जा रहा हैं। इस मौके पर प्रमुख रूप से पार्वती देवी, रतन अग्रवाल, चम्पा अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, माधव अग्रवाल सहित काफी संख्या में भक्तगण भगवान की कीर्तन श्रवण कर आनन्द प्राप्त किया।





































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