Jamshedpur (Nagendra) मानगो नगर निगम और जुगसलाई नगर परिषद के बहुचर्चित व रोचक मुकाबलों के परिणाम आखिरकार घोषित हो गए। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सुधा गुप्ता ने मानगो में शानदार जीत दर्ज करते हुए एनडीए समर्थित प्रत्याशी संध्या सिंह को 18,601 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं जुगसलाई नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में नौशीन खान ने 720 मतों से जीत हासिल की। मानगो में रणनीति बनाम प्रबंधन की लड़ाई मानगो नगर निगम चुनाव की मतगणना चार राउंड में संपन्न हुई। सुधा गुप्ता को कुल 42,022 मत प्राप्त हुए। एनडीए समर्थित उम्मीदवार संध्या सिंह को 23,421 मत मिले। परिणामों की घोषणा होते ही पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता और सुधा गुप्ता के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज रही कि अब “मेयर पति” के रूप में बन्ना गुप्ता की भूमिका भी सुर्खियों में रहेगी।
इस चुनाव में भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों सहित बड़े नेताओं को मैदान में प्रचार के लिए उतारा था। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर बूथ मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति में तालमेल की कमी भाजपा के लिए भारी पड़ी। इसके विपरीत, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने पूरी चुनावी रणनीति की बारीकी से निगरानी की। संगठित टीमवर्क, सतत जनसंपर्क और सुधा गुप्ता की सरल, सौम्य एवं सुलभ छवि ने मतदाताओं का भरोसा जीतने में अहम भूमिका निभाई। विधानसभा चुनाव से अलग इस बार उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
चुनाव में जेबा खान ने भी 11,166 मत प्राप्त कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, हालांकि वे मुकाबले को निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंचा सकीं। राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो उनके मतों ने मुकाबले को त्रिकोणीय जरूर बनाया, लेकिन अंतिम परिणाम पर सीधा असर नहीं डाल पाए।
जुगसलाई में कांटे की टक्कर, नौशीन खान विजयी -जुगसलाई नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। नौशीन खान को 11,563 मत प्राप्त हुए। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनडीए समर्थित प्रत्याशी रिंकू सिंह को मात्र 720 मतों से हार का सामना करना पड़ा। वहीं मतगणना केंद्र के बाहर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान आत्मविश्वास से लबरेज नजर आए। पूरे मतगणना के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों की नजरें हर राउंड पर टिकी रहीं। अंतिम परिणाम तक स्थिति बेहद दिलचस्प बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो समर्थित प्रत्याशी की मौजूदगी और मतों के बंटवारे ने मुकाबले को और रोचक बना दिया। लगभग उतने ही मतों के अंतर से रिंकू सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जितने मत तीसरे प्रत्याशी को मिले। मानगो और जुगसलाई दोनों निकायों के परिणामों ने स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर दी है। एक ओर जहां मानगो में कांग्रेस समर्थित नेतृत्व को मजबूती मिली है, वहीं जुगसलाई में नई अध्यक्ष के सामने विकास, आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को लेकर बड़ी चुनौतियां होंगी। इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में रणनीति, जमीनी पकड़ और उम्मीदवार की छवि निर्णायक भूमिका निभाती है।
सुधा गुप्ता के माथे पर जिम्मेदारियों का बोझ -मानगो नगर निगम की पहली मेयर बनने के साथ ही सुधा गुप्ता पर जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ सामने आ गया है। उन्हें अब मानगो की नीट एंड क्लीन रखना होगा। हर किस्म के मतदाताओं ने उनके ऊपर भरोसा दिखाया है। वह अपने पति पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के अनुभवों से सीख कर मानगो को शानदार शहर बनाएंगी, ऐसी उम्मीद की जाती है।
मानगो हाल तक अनेक समस्याओं से जूझता रहा है। पानी, बिजली, साफ-सफाई के साथ-साथ सड़क, यातायात और कानून व्यवस्था की समस्याएं भी यहां मुंह बाए खड़ी हैं। एक रात में तो कुछ होगा नहीं क्योंकि समस्याएं काफी जटिल किस्म की हैं। किसी घर में रात में 12 बजे पानी जाता है, किसी में आता ही नहीं और किसी में आता है तो इतना आता है कि पूछिए मत। इन चीजों को नियमित करना होगा।
निश्चित तौर पर यह चुनाव बेहद पेचीदा था लेकिन जो जीता, वही सिकंदर। सुधा गुप्ता चुनाव जीती हैं, इसलिए उन्हें बधाई। उनसे न्यूनतम अपेक्षा मानगोवासी यही रखेंगे कि आने वाले चंद दिनों में मानगो की साफ-सफाई को ठीक करें। यह आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। बाकी जो चुनौतियां हैं, उन्हें बाद में भी देखा जा सकता है लेकिन साफ-सफाई को उन्हें सबसे पहले रखना चाहिए। जिन लोगों ने उन्हें मत दिया है, वो अब सेवा भी चाहते हैं। इसलिए श्रीमती गुप्ता को हनीमून पीरियड की उम्मीद न कर अभी से ही योजना बनाने, उसे अमल में लाने और प्रापर परिणाम देने की दिशा में काम करना होगा।
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