- “हमेशा के वैलेंटाइन”: सुधीर और योगिता पुथरण की प्रेमगाथा
Mumbai (Anil Bedag) वैलेंटाइन डे केवल गुलाब और ग्रीटिंग कार्ड का दिन नहीं, बल्कि उन रिश्तों का उत्सव है जो समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं। सुधीर राजू पुथरण और उनकी जीवनसंगिनी योगिता राजू पुथरण के लिए यह दिन उनके प्रेम, विश्वास और साथ निभाने की अनकही प्रतिज्ञाओं का प्रतीक है, एक ऐसा बंधन, जो रोमांस से शुरू होकर दांपत्य की गहराई में खिल उठा। सुधीर मानते हैं कि सच्चा प्रेम वही है जो हर परिस्थिति में साथ निभाए। उनके अनुसार, जब एक प्रेमी जोड़ा जीवन के उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का हाथ थामे रखता है, तभी वे पति-पत्नी के रूप में हमेशा के वैलेंटाइन” बनते हैं। दांपत्य जीवन में वैलेंटाइन डे उस विश्वास का उत्सव है, जो धीरे-धीरे प्रेम को और गहरा बनाता है। यह दिन उन्हें याद दिलाता है कि शादी के बाद भी रोमांस जिंदा रखा जा सकता है, बस जरूरत है सच्चे इरादों और छोटे-छोटे प्रयासों की।
योगिता कहती हैं कि असली उपहार समय है, वह समय जो एक-दूसरे के लिए बिना शर्त दिया जाए। उनका मानना है कि वैलेंटाइन डे केवल एक दिन का जश्न नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का अवसर है कि प्रेम को हर दिन संजोना पड़ता है। विश्वास, समझ और समर्पण—इन्हीं तीन स्तंभों पर उनका रिश्ता खड़ा है, जो शुरुआती आकर्षण को एक स्थायी, गहरे वैवाहिक बंधन में बदल देता है।रश्मि और सुधीर का दांपत्य जीवन इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। उनके लिए वैलेंटाइन डे महंगे उपहारों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि साथ बिताए गए छोटे-छोटे पलों की मिठास है। कभी पुरानी तस्वीरों को देखकर यादें ताज़ा करना, कभी अचानक प्लान की गई सरप्राइज डेट, तो कभी रसोई में साथ खाना बनाते हुए हंसी-मज़ाक, ये सब उनके रिश्ते को हर साल नया रंग देते हैं।

No comments:
Post a Comment