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Mumbai मुंबई के दीक्षा महोत्सव में पहुंचे गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी Gujarat Deputy Chief Minister Harsh Sanghvi reached Mumbai's Deeksha Mahotsav

 



  • संयम रंग उत्सव में हर्ष संघवी ने लिया पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद
Mumbai (Anil Bedag)  मुंबई की मायानगरी उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठी, जब भव्य “संयम रंग उत्सव” दीक्षा महोत्सव में वैराग्य, त्याग और तपस्या का अनुपम दृश्य साकार हुआ। सांसारिक आकर्षणों से दूर, आत्मकल्याण के पथ पर अग्रसर होने का संकल्प लेते हुए 64 मुमुक्षुओं ने दीक्षा ग्रहण कर जीवन का नया अध्याय प्रारंभ किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष संघवी विशेष रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम की गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान श्री संघवी ने पूज्य योगतिलकसूरीश्वरजी महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि जैन धर्म की तप, त्याग और आत्मसंयम की परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों और शांति के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा भी देते हैं।


🌼 64 आत्माओं का ऐतिहासिक संकल्प -दीक्षा महोत्सव में 64 दीक्षार्थियों ने सांसारिक जीवन का परित्याग कर संयम के पथ को अपनाया। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भावविभोर कर देने वाला था। परिवारों की आंखों में आंसू थे, लेकिन उन आंसुओं में विरह से अधिक गर्व और आध्यात्मिक संतोष झलक रहा था। श्री हर्ष संघवी ने सभी दीक्षार्थियों से भेंट कर उनके साहसिक निर्णय की सराहना की और कहा कि त्यागमय जीवन का यह संकल्प समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। उल्लेखनीय है कि सूरत जहां से श्री संघवी लोकप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित हुए हैं, बीते दस वर्षों में पूज्यश्री की पावन निश्रा में 7, 45, 36, 18 और 74 जैसी ऐतिहासिक सामूहिक दीक्षा महोत्सवों का साक्षी रहा है। इन अभूतपूर्व आयोजनों ने सूरत को देश-विदेश में ‘दीक्षा भूमि’ के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई है।


आज जब भौतिकता की दौड़ तेज होती जा रही है, ऐसे में संयम रंग उत्सव जैसे आयोजन समाज को आत्मचिंतन, आत्मसंयम और अध्यात्म की ओर लौटने का संदेश देते हैं। मुंबई की इस पावन धरती पर संपन्न हुआ यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण का महापर्व बनकर उभरा,  जहां त्याग की तपिश में आस्था का उजास और अधिक प्रखर हो उठा।


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