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Bhopal अफवाहों पर नहीं संयम,सहयोग और सहभागिता पर भरोसा जरूरी Restraint not on rumours, trust in cooperation and participation is necessary

 


       Upgrade Jharkhand News. वर्तमान समय में विश्व एक अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहाँ युद्ध की विभीषिकाएं और वैश्विक अस्थिरता मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ आर्थिक तंत्र को भी झकझोर रही हैं। रूस, अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के मध्य उपजा तनाव केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के हर कोने पर परिलक्षित हो रहा है। भारत, जो अपनी शांतिप्रिय नीति और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के लिए जाना जाता है, स्वाभाविक रूप से इस वैश्विक उथल-पुथल से अछूता नहीं रह सकता। जिन देशों के बीच आज युद्ध की स्थिति बनी हुई है, उनके साथ भारत के प्रगाढ़ व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध हैं। आयात-निर्यात के चक्र में आए इस अवरोध ने निश्चित रूप से कुछ चुनौतियां पेश की हैं, विशेषकर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति को लेकर एक संभावित चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। लेकिन भारतीय परिप्रेक्ष्य में सबसे सुखद और सकारात्मक पहलू यह है कि हमारी सरकार और प्रशासन इन संकटों के प्रति न केवल सजग हैं, बल्कि अत्यंत सक्रियता के साथ भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।


​युद्ध के बादलों के बीच जब ऊर्जा सुरक्षा को लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हुई, तो केंद्र सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए तत्काल एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि आम नागरिक के घर की रसोई का चूल्हा निर्बाध रूप से जलता रहे। इसी उद्देश्य से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर कुछ विवेकपूर्ण अंकुश लगाए गए ताकि घरेलू स्तर पर रसोई गैस की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। यह निर्णय सरकार की उस संवेदनशीलता को दर्शाता है जिसमें वह सबसे पहले आम जनता के हितों की रक्षा करना चाहती है। हालाँकि, बाज़ारों में व्याप्त कुछ निराधार अफवाहों के कारण लोगों में एक प्रकार का उतावलापन और अतिरिक्त भंडारण की प्रवृत्ति देखी गई, जिसका लाभ उठाने के लिए कुछ अवसरवादी तत्व और कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए। संकट के समय में निजी स्वार्थ की पूर्ति करना एक पापपूर्ण कृत्य है, लेकिन संतोषजनक बात यह है कि प्रशासन ने इन तत्वों के विरुद्ध निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है।


​खाद्य आपूर्ति विभाग और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तत्परता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की जमाखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्षेत्रीय प्रशासन के साथ मिलकर अवैध गोदामों पर हो रही छापेमारी और भारी मात्रा में बरामद किए जा रहे गैस सिलेंडर इस बात का प्रमाण हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। अनुचित लाभ कमाने की कुचेष्टा करने वाले लोग आज सलाखों के पीछे पहुँच रहे हैं। यह सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति ही है जिसने अफवाहों के बाजार को शांत करने के लिए धरातल पर कड़े कदम उठाए हैं। जनता को भी यह समझने की आवश्यकता है कि किल्लत की खबरें वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि चंद स्वार्थी लोगों के दुष्प्रचार का परिणाम हैं। ऐसे समय में जब संपूर्ण राष्ट्र को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना चाहिए। कुछ स्वार्थी राजनीतिक दलों की ओर से आने वाली नकारात्मकता दुर्भाग्यपूर्ण हो सकती है, किंतु सत्य यह है कि सरकार की पारदर्शी नीतियों ने जनता के विश्वास को डिगने नहीं दिया है।


​भारतीय कूटनीति की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वैश्विक तनाव के बावजूद कच्चे तेल की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है। मुंबई के बंदरगाह पर कच्चे तेल से भरे दो विशाल जहाजों का पहुँचना इस बात का शुभ संकेत है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला टूटी नहीं है। जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री मार्गों से आने वाले जहाजों की सुरक्षा और उनकी सुगम आवाजाही के लिए भारत सरकार निरंतर खाड़ी देशों के संपर्क में है। हमारे कूटनीतिक संबंध इतने सशक्त हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी मित्र राष्ट्र भारत के प्रति अपने सहयोग का हाथ पीछे नहीं खींच रहे हैं। यह भारत की बढ़ती वैश्विक साख का ही परिणाम है कि हम अपनी आवश्यकताओं को सुरक्षित करने में सफल हो रहे हैं। हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि भारत ने अतीत में भी कई बड़े संकटों को मात दी है।


आज युद्ध की विभीषिकाओं से उत्पन्न यह आर्थिक चुनौती  है, जिससे हम अपनी सामूहिक शक्ति और धैर्य के बल पर सकुशल बाहर निकलेंगे। सरकार पर भरोसा रखना और अफवाहों से दूरी बनाए रखना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। जिस प्रकार संकटग्रस्त क्षेत्रों से हजारों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया, उसी प्रकार पेट्रोलियम पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रवाह भी सुरक्षित रूप से जारी रहेगा। भारत का प्रत्येक नागरिक यदि संयम बरते और आवश्यकतानुसार ही वस्तुओं का उपभोग करे, तो कालाबाजारी करने वालों के मंसूबे स्वतः ही ध्वस्त हो जाएंगे। ​भविष्य की ओर देखते हुए हमें सकारात्मक रहना चाहिए। सरकार की सक्रियता, प्रशासन की मुस्तैदी और हमारे कूटनीतिज्ञों के अथक प्रयास यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि देश में हालात बहुत जल्द सामान्य हो जाएंगे। जहाजों का आवागमन, रणनीतिक भंडारण का प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति की सख्त निगरानी यह विश्वास दिलाती है कि हम एक सुरक्षित और समर्थ राष्ट्र का हिस्सा हैं। यह समय घबराने का नहीं, बल्कि जागरूक रहने का है। जब हम मिलकर अफवाहों का खंडन करेंगे और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे, तो कोई भी संकट हमारी प्रगति की गति को नहीं रोक पाएगा। भारत की जीवटता और उसकी संकल्प शक्ति हमेशा से संकटों से बड़ी रही है, और इस बार भी हम विजय होकर ही निकलेंगे। डॉ. राघवेंद्र शर्मा



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