- डायन प्रथा एक कुरीति है, जागरूकता ही रोकथाम का कारगर उपाय
Jamshedpur (Nagendra) झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जमशेदपुर द्वारा सिदगोड़ा टाउन हॉल में राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन एवं राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया , जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश सह राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष सह एडमिनिस्ट्रेटिव जज (जमशेदपुर जजशिप) न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, विशिष्ठ अतिथि के रुप में झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री रंजना अस्थाना तथा सम्मानित अतिथि के रुप में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर अरविंद कुमार पांडेय, उपायुक्त सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार कर्ण सत्यार्थी, ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग तथा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आर एन दास मंच पर मौजूद रहे.
इस दौरान मुख्य अतिथि सुजीत नारायण प्रसाद ने धनबाद एवं रांची डालसा द्वारा आयोजित नेशनल लोक अदालत के बारे में भी वर्चुअल बात कर संबंधित जानकारी ली। न्यायमूर्ति श्री प्रसाद ने जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम मे उन्होंने कहा कि इस वर्ष 2026 का यह पहला नेशनल लोक अदालत लगाया गया है. लोक अदालत विवादों के निपटारे का एक न्यायिक मंच है. क्योंकि आज कल विवाद होना आम बात हो गई है. चाहे वह जमीन विवाद हो, बैंक से जुड़ा मामला हो, बिजली बिल से जुड़ा विवाद हो अथवा अन्य विवाद. इस तरह के मामलों के निपटारे के लिए लोक अदालत लगाया जाता है.
जहां आपसी समझौता के माध्यम से सुलह कराकर केस का निपटारा होता है. सशक्तिकरण शिविर लगाए जाने पर चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति श्री प्रसाद ने कहा कि सरकार नागरिकों के उत्थान के लिए पॉलिसी बनाती है तथा योजनाएं लाती है . योजनाओं का लाभ अगर लाभुक को नहीं मिले तो फिर पॉलिसी बनाने का कोई तूक नही है. योजना के आवंटन मद का शत-प्रतिशत खर्च योजनाओं के क्रियान्वयन को दर्शाता है. यह कोशिश होनी चाहिए की आवंटित राशि पूरी तरह खर्च हो. उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं न्यायिक जागरूकता के लिए पंचायतों में पारा लीगल वोलंटियर्स (अधिकार मित्र) लगाए गए हैं जो वंचित एवं पीड़ित लोगों को विकास के मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं .
नशा के कारोबार पर रोक जरूरी -न्यायमूर्ति श्री प्रसाद ने कहा कि आज-कल नशा का प्रचलन काफी बढ़ गया है. इसके कई दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं. उन्होंने नशा के कारोबार पर रोक लगाने की अपील की. वहीं डायन प्रथा को कुरीति बताया. कहा इसकी आड़ में निर्दोष लोगों की हत्याएं हो रही हैं. इसकी रोकथान के लिए जागरूकता कारगर साबित हो सकता है. वहीं ट्रैफिकिंग की चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा कि यह भी एक गंभीर समस्या बन रही है. कई-कई वर्षों से बच्चे गायब हैं. जिनका सुराग नहीं मिल पा रहा है. खोजबीन में सरकार काफी पैसे खर्च कर रही है. लेकिन कार्रवाई नगण्य साबित हो रही है. पलायन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कई लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं. लेकिन उनके साथ वहां अन्याय होने लगता है. ऐसी स्थिति के शिकार लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ना बेहतर रहेगा. दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं. इसे रोकने की दिशा में कारगर कदम उठाने की जरूरत है.
लोगों को न्याय दिलाने में पीएलवी सहायक : न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव -झारखंड हाई कोर्ट केन्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सबकों मिले यह सुनिश्चित होना चाहिए. इसके लिए विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर जैसे कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं. पूर्वी सिंहभूम जिले की चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें खुशी है कि यह जिला योजनामद में आवंटित राशि का 80-90 प्रतिशत तक खर्च कर रहा है. योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं कोर्ट में चल रहे मामलों में लोगों को न्याय दिलाने में पीएलवी (अधिकार मित्र) सहायक बन रहे हैं. इससे पहले स्वागत भाषण झालसा की सदस्य सचिव सुश्री रंजना अस्थाना ने दिया. जबकि उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम कर्ण सत्यार्थी ने पूर्वी सिंहभूम जिले में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति से सभी को अवगत कराया.
कार्यक्रम के अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इससे पहले मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों को पौधा, मोमेंटो एवं शॉल प्रदान कर स्वागत किया गया. उसके बाद दीप जलाकर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया. कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान गाकर की. तत्पश्चात हिंदी व संथाली में नालसा सॉन्ग (गीत) द्वारा कार्यक्रम की शुरुआत की गई . कार्यक्रम में डालसा सचिव कुमार सौरव त्रिपाठी सहित जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के अन्य सभी न्यायायिक पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी व आम नागरिक तथा लाभुक गण मुख्य रूप से उपस्थित रहे .
1030 लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का किया गया वितरण -राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर में 1030 लाभुकों के बीच कुल 33 करोड़, 43 लाख, 13 हजार 34 रुपये की परिसंपत्ति का वितरण किया गया. वैसे सांकेतिक रुप से मंच पर 12 लाभुकों के बीच मुख्य अतिथि झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं अन्य अतिथियों ने परिसंपति का वितरण किया. इसके अलावा दुर्घटना के 9 क्लेम चेक भी पीड़ित परिवार को दिया गया। उसके बाद विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए 18 स्टॉल का एक-एक करके विजिट किए , जिसमें जेएसएलपीएस, कल्याण विभाग, समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा (पेंशन), उद्यान विभाग, सहकारिता विभाग, गब्य, पशुपालन, मतस्य, स्वास्थ्य, श्रम विभाग एवं डीआरडीए, डीएलएए एवं आधार सेंटर आदि के स्टॉल शामिल हैं. सिदगोड़ा टाऊन हॉल में कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्य अतिथि समेत सभी गणमान्य लोग व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचे, जहां अपने हाथों से पौधारोपण कर स्वच्छ वातावरण का संदेश दिया । उसके बाद मुख्य अतिथि ने नेशनल लोक अदालत के सभी बेचों का निरीक्षण भी किया।
नेशनल लोक अदालत में कुल 2, 90,458 केसों का निपटारा हुआ और 46,60,31,946 रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई
जिला विधिक सेवा प्राधिकार जमशेदपुर के सचिव कुमार शौरव त्रिपाठी ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में कुल 2,90,458 मामलों का निपटारा किया गया , जिसमें 46,60,31,946 रूपए की राजस्व प्राप्ति हुई है। उन्होंने बताया कि निष्पादन किए गए सभी मामलों में कोर्ट केस 12,266 और प्रीलिटिगेशन केस 2,78,192 मामले शामिल हैं । सभी लंबित मामलों के निष्पादन के लिए जमशेदपुर कोर्ट में कुल 13 बेंच और घाटशिला अनुमंडल कोर्ट में कुल तीन बेंच गठित की गई थी।





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