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Jamshedpur सूदर्शनाचार्य महाराज ने बच्चों को संस्कारित और सदाचारी बनाने के लिए किया प्रेरित Sudarshanacharya Maharaj inspired children to become cultured and virtuous.

 


Jamshedpur (Nagendra) बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में चल रहे सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन बुधवार को व्यासपीठ से चित्रकुट के प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी सूदर्शनाचार्य महाराज ने नारद मोह, सृष्टि वर्णन, धनवति कुबेर परिचय, गंगा अवतरण, समुद्र मंथन, नारी धर्म, अर्धनारीश्वर कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए बच्चों को संस्कारित और सदाचारी बनाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि मानव जीवन के कल्याण के लिए शिव पुराण में नारद भक्ति क्रमशः श्रवण, कीर्तन, स्मरण, वंदना, पूजन और आत्म निवेदन का मार्ग है। शिव भक्ति से जीवन में यश, बल, बुद्धि, विद्या और दीर्घ आयु के साथ ही सुख समृद्धि भी प्राप्ति होती है। धनवति कुबेर परिचय का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अनजाने में की गई शिव भक्ति भी पापों का नाश कर मनुष्य को ऐश्वर्य और भगवान के करीब ला सकती है। 


कुबेर (पूर्व जन्म में गुणनिधि) एक महापापी व्यक्ति थे, लेकिन शिवरात्रि के दिन अनजाने में शिवलिंग के पास दीपक जलाने (जागरण) से उन्हें महादेव की अपार कृपा प्राप्त हुई। इस पुण्य से वे अगले जन्म में धन के देवता बने। शिवजी की तपस्या कर उन्होंने यक्षों का स्वामित्व और अटूट मित्रता प्राप्त की। उन्होंने आगे कहा कि शिव महापुराण में नारी धर्म के अंतर्गत पतिव्रता धर्म, सदाचार और भक्ति को सर्वाेच्च बताया गया है। कथाओं में पार्वती जी का कठोर तप, सती द्वारा पति सम्मान की रक्षा और चंचुला की कहानी प्रमुख है, जो सिखाती हैं कि मन-वचन से पति के प्रति समर्पण, तीर्थ सेवा, और शिव भक्ति ही नारी का सच्चा धर्म है, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। सृष्टि वर्णन की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि भगवान शिव की माया से प्रकृति (शक्ति) और काल के संयोग से सृष्टि का सृजन, पालन एवं संहार होता है। 


अंत में सब कुछ पुनः शिव में ही विलीन हो जाता है, इसलिए शिव को सृष्टि का मूल माना गया है। कथावाचक ने कहा कि नारद मोह का प्रसंग अहंकार के विनाश और भगवान की माया के अधीन सभी के होने का पाठ पढ़ाता है। इसका आयोजन धार्मिक संस्था मित्र कांवड संघ टाटानगर द्धारा किया जा रहा हैं। तीसरे दिन गुरूवार को कथावाचक सती चरित्र, पार्वती जन्म, शिव विवाह उत्सव कथा का प्रसंग सुनाएगें। आज के मुख्य यजमान पुष्पा देवी-रामा कांत साह और अंचल-मनीष कश्यप थे।  आज सुबह 7 से 10 बजे तक संस्था से जुड़े 11 जोड़ो ने पूजा करायी। इस मौके पर महेश कश्यप, पवन प्रसाद, विमल अग्रवाल, गौतम सरायवाला, राहुल अग्रवाल, संकटा सिंह सहित काफी संख्या में भक्तगण शामिल थे। शिवकथा का प्रवचन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक हो रहा हैं।



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