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Bhopal व्यंग्य : झाड़ू का कॉकरोच प्रेम Satire: Cockroach's love for the broom

 


Upgrade Jharkhand News.  अंततः झाड़ू ने स्पष्ट कर दिया कि वह किचन के सफाई अभियान में भाग नहीं लेगी, विशेषकर तब जब उसे कॉकरोच पर निर्ममतापूर्ण व्यवहार करने का आदेश दिया जाएगा। यानि झाड़ू कॉकरोच का साथ निभाएगी, उस पर आने वाली किसी भी विपदा से उसे बचाएगी। यह तो वही बात हुई जैसे सांप नेवले से कहे कि भाई दुश्मनी में क्या रखा है, आओ एकजुट हो जाएं यानि एक दूसरे के सुर में सुर मिलाएं।     अपने यहाँ कब किसके प्रति किसके मन में प्यार उमड़ आए, पता नहीं लगाया जा सकता। सदियों से किचन में घुसपैठ करने वाले कॉकरोच परेशान थे, उनके अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा था, उनके सम्मुख अस्तित्व बचाए रखने का संकट था। आखिर कब तक कॉकरोच चुप रहते, जुल्म सहते। कीटनाशक दवाओं के चलते बार बार बेहोश होकर या प्राण त्यागकर झाड़ू से घरों के बाहर कूड़े में फिकवाए जाते। सो उन्होंने झाड़ू से गुहार लगाना ही उचित समझा। झाड़ू स्वयं अपने दुःख से दुखी थी। उसके अस्तित्व पर स्वयं ही प्रश्नचिन्ह खड़े थे। उसका स्थान आधुनिक मशीनों ने जो ले लिया था। सफाई के लिए मशीनें जो आ गई थी। कॉकरोच की गुहार से झाड़ू की थमती हुई सांसों में नई जान आ गई। सूचना क्रांति के युग में झाड़ू संगठन सक्रिय हो गया , जिस झाड़ू संगठन पर कॉकरोच को धराशाई करने का दायित्व था। वह खुद को कॉकरोच सिद्ध करने में जुट गया। जिसे देखो वही खुद को कॉकरोच बताने लगा। 


कॉकरोच का स्लोगन लगाकर स्वच्छता के पैरोकार फेसबुक और इंस्टाग्राम की सडकों पर उतर आए। वाकई यह सुखद संयोग था, कि जब झाड़ू और कॉकरोच ने मिलकर होली खेलने का कार्यक्रम बनाया, दोनों एक ही कोरस गाने लगे, कि दुश्मन दुश्मन जो दोस्तों से भी प्यारा है। झाड़ू के संग कॉकरोच का रिश्ता पुराना है। भले ही उनके रिश्ते में कभी खटास आई हो, मगर अवसरवादी राजनीतिज्ञों की तरह रिश्तों में मिठास का दिखावा तो किया ही जा सकता है। वैसे भी आज के दौर में दुश्मनी स्थाई नहीं रह सकती। एक दूसरे को गालियाँ देकर एक दूसरे की जान के दुश्मन बने शत्रु न जाने कब एक दूसरे के सुर में सुर मिलाने लगें, कोई नहीं जानता। वे कब एक दूसरे के साथ चाय की चुस्कियां लेते हुए कहने लगें , कि तुमने मुझे गाली दी या ,मैंने तुम्हें गाली दी, कोई बात नहीं मेरे यार, एक दूसरे को गले लगाकर दोनों बन जाएं रंगे सियार। 


यही चल रहा है। जिस झाड़ू को कॉकरोच कभी नहीं सुहाया, वही झाड़ू कॉकरोच को संरक्षण प्रदान करने में स्वयं को खुसनसीब समझ रही है। कॉकरोच खुश हैं, विचार रहे हैं, कि वे भी बड़े आंदोलन को जन्म देकर सत्ता सुख भोग सकते हैं। जब झाड़ू और कॉकरोच में दोस्ती प्रगाढ़ हो जाए, तब उनकी भूमिका और भी अधिक असरकारी हो सकती है। सुधाकर आशावादी



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