Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Bhopal प्रधानमंत्री मोदी के बारह साल और मध्य प्रदेश Twelve years of Prime Minister Modi and Madhya Pradesh

 


Upgrade Jharkhand News.  ​मध्य प्रदेश की राजनीति के मिजाज को समझने के लिए इसके अलग-अलग अंचलों की जमीनी हकीकत को करीब से देखना बेहद जरूरी है। इसके लिए महाकौशल के जंगलों, मालवा के तपते मैदानों, बुंदेलखंड की पथरीली जमीन और चंबल के घने बीहड़ों  के बीच बसे गांवों के जमीनी माहौल को समझना जरूरी है। अपने पत्रकारिता के अब तक के सफर में, मैंने जमीनी स्तर पर कई बड़े विकास कार्यक्रमों और जनसभाओं को कवर किया है। इस दौरान मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी कई कार्यक्रम, सभाएं कवर की। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के बारह वर्ष पूरे होने के इस पड़ाव पर जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो एक पत्रकार के रूप में मेरा यह स्पष्ट और सीधा व्यावहारिक अनुभव रहा है कि उनकी सभाओं का माहौल हमेशा किसी उत्सव या एक जबरदस्त सामूहिक 'उन्माद' जैसा रहा है। श्रोताओं में जो जोश, जो करंट और जो उत्साह मैंने इन वर्षों में अपनी आंखों से देखा है, वह देश के किसी दूसरे नेताओं की सभाओं या कार्यक्रमों में नहीं दिख पाता। यही वह खूबी है जो नरेंद्र मोदी को भारत के बाकी तमाम नेताओं से अलग करती है और 12 साल के लंबे शासनकाल के बाद भी उन्हें राजनीति के शीर्ष पर सिरमौर बनाकर रखती है।


​इन बारह वर्षों में दिल्ली की सत्ता से चली नीतियां मध्य प्रदेश के सुदूर गांवों और आदिवासियों तक किस रूप में पहुँचीं और इसने बुनियादी ढांचे को कैसे बदला, यह देखना किसी भी राजनीतिक विश्लेषक के लिए एक जीवंत अनुभव है।  इन 12 वर्षों के दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के मालवा हिस्से (रतलाम-मंदसौर) का निर्माण, भोपाल-इंदौर मेट्रो परियोजना की प्रगति और जल जीवन मिशन के जरिए घर-घर पहुँचे पानी ने मध्य प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहाँ राज्य के चुनाव बिजली, सड़क और पानी के बुनियादी संकटों के इर्द-गिर्द सिमटे रहते थे, वहीं आज का मध्य प्रदेश एक्सप्रेस वे, डिजिटल गवर्नेंस और वैश्विक कनेक्टिविटी की भाषा बोलता है। ​एक पत्रकार का कार्य केवल दौरों और घोषणाओं की सूची बनाना नहीं है, बल्कि यह देखना भी है कि इस विकास ने जमीनी स्तर पर जनता की सोच और उम्मीदों के स्तर को कहाँ पहुँचा दिया है। निश्चित रूप से,  इस बारह साल के लंबे सफर में रोजगार के नए अवसरों का सृजन और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कमियों को दूर करना जैसी अनेक चुनौतियां आज भी मौजूद हैं, जिन पर निरंतर बात होनी चाहिए। परंतु, जब इन सब चुनौतियों के बीच नेतृत्व की विश्वसनीयता का मूल्यांकन होता है, तो नरेंद्र मोदी का पलड़ा भारी दिखाई देता है।


​एक पत्रकार या लेखक जब मंच के सामने खड़े होकर जनसमूह को देखता,परखता है, तो वह केवल राजनेता का भाषण नोट नहीं करता, बल्कि जनता के चेहरों के भाव पढ़ता है। इन बारह वर्षों में मेरे द्वारा कवर की गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न सभाओं और कार्यक्रमों में मैंने एक बहुत ही स्पष्ट सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव महसूस किया है। राजनीतिक रैलियों में अक्सर कोई एक वर्ग हावी होता है, लेकिन मोदी की सभाओं में मैंने  एक अलग ही  समागम देखा है। जहाँ एक ओर 18-20 वर्ष का युवा उनके डिजिटल इंडिया और तकनीकी विजन से प्रभावित होकर पूरे जोश में रहता है, वहीं दूसरी ओर साठ और सत्तर के दशक को देख चुका बुजुर्ग वर्ग उनमें देश का एक मजबूत और साहसी रक्षक देखता है। मध्य प्रदेश के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस इंदौर-भोपाल जैसे महानगरों तक, मोदी की सभाओं का ऊर्जा-स्तर एक जैसा होता है।  ग्रामीणों के चेहरों का उत्साह और शहर के मध्यवर्गीय युवाओं की उम्मीदें, दोनों मंच पर मौजूद एक चेहरे पर आकर टिक जाती हैं। मैंने जब सभाओं में उपस्थित महिलाओं से बात की तो महसूस हुआ कि रैलियों में महिलाओं की भारी उपस्थिति केवल भीड़ का हिस्सा नहीं है। जब मोदी मंच से सीधे संवाद करते हैं, तो पंडाल के अंतिम छोर पर बैठी ग्रामीण महिला के चेहरे पर जो आश्वस्त मुस्कान दिखाई देती है, वह पिछले 12 वर्षों में उनके जीवन में आए बुनियादी सुधारों (जैसे आवास, बिजली और पानी) के प्रति एक मूक कृतज्ञता होती है।  श्रोताओं की भारी भीड़ और उसका जो जोश सभाओं में दिखता, यह किसी के कहने से या सिर्फ बसें भरकर लाने से पैदा नहीं होता। यह एक आंतरिक जुड़ाव है, जो पिछले 12 सालों में और ज्यादा गहरा हुआ है।


​प्रधानमंत्री मोदी के पिछले बारह वर्षों के मध्य प्रदेश दौरे केवल राजनीतिक रैलियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनका हर एक दौरा राज्य के बुनियादी ढांचे को बदलने वाली किसी बड़ी परियोजना के शिलान्यास, आधारशिला या लोकार्पण की गवाही देता रहा है। बुंदेलखंड की प्यासी धरती दशकों से पानी के संकट और पलायन के अभिशाप को झेल रही थी। अस्सी और नब्बे के दशक में यहां  सूखे की स्थिति यह थी कि धर्मयुग जैसी पत्रिका ने इस पर कवर स्टोरी की और विशेष रुप से मेरे पिताजी श्री दिनेश चंद्र वर्मा से यहां के जल संकट पर फीचर स्टोरी लिखवाई गयी। इस अंचल की तकदीर बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने डेढ़ साल पहले  खजुराहो और बुंदेलखंड के अपने दौरे में 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' की आधारशिला रखी। देश की इस पहली नदी-जोड़ो परियोजना के शिलान्यास ने छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर जैसे जिलों के किसानों के जीवन में एक नया विश्वास फूंका है, जिसे मैंने स्वयं महसूस किया है। वहीं भोपाल का ऐतिहासिक जम्बूरी मैदान प्रधानमंत्री के कई युगांतरकारी विजन का साक्षी रहा है। अपने एक महत्वपूर्ण दौरे में उन्होंने न केवल देश के सबसे आधुनिक और पहले विश्वस्तरीय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण कर बुनियादी ढांचे की नई परिभाषा लिखी, बल्कि इसी मंच से जनजातीय गौरव दिवस का शंखनाद भी किया। गोंड साम्राज्य की रानी कमलापति और भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान के जरिए उन्होंने मध्य प्रदेश की विशाल आदिवासी आबादी को यह अहसास कराया कि वे देश के विकास में अग्रिम पंक्ति के हकदार हैं। इसी जम्बूरी मैदान से पिछले साल प्रधानमंत्री ने देश भर में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। इसी मैदान से उन्होंने पाकिस्तान और आतंकवादियों को चेतावनी दी थी कि " तुम गोली चलाओगे तो मान के चलो, गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा"।


अपने बारह साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी का विंध्य क्षेत्र के रीवा का दौरा मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने वाला साबित हुआ। प्रधानमंत्री ने यहाँ 750 मेगावाट के रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी और इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरे ने मध्य प्रदेश को रिन्यूएबल ऊर्जा के मामले में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया। इस पिछड़े माने जाने वाले अंचल के लिए यह गर्व का क्षण था कि उनके यहाँ बनने वाली सौर ऊर्जा आज देश की राजधानी की लाइफलाइन (दिल्ली मेट्रो) को गति दे रही है।      महाकौशल के शहडोल में प्रधानमंत्री का दौरा पूरी तरह से मानवीय और स्वास्थ्य चेतना को समर्पित था। यहाँ उन्होंने 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' की शुरुआत की और जनजातीय समाज को इस वंशानुगत बीमारी से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों के विकास के लिए सैकड़ों करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया गया। इस दौरे में उनका स्थानीय जनता के बीच जमीन पर बैठकर संवाद करना उनके जन-कनेक्ट को एक अलग ऊंचाई दे गया।


​पत्रकारिता के अपने इस सफर में मैंने कई मुख्यमंत्रियों-प्रधानमंत्रियों को देखा है लेकिन आम जनता के साथ ऐसा सीधा, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक संबंध मैंने किसी अन्य राजनेता में नहीं देखा। यही वह मूल कारण है, जो बारह साल के लंबे शासनकाल के बाद भी एंटी-इन्कम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को बेअसर करते हुए नरेंद्र मोदी को भारतीय राजनीति का निर्विवाद सिरमौर बनाए रखता है। यह मध्य प्रदेश के मैदानों, शिलान्यासों और रैलियों से छनकर निकला वो जमीनी सच है, जिसे मैंने विगत बारह वर्षों में महसूस किया है।पवन वर्मा



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

.