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Chandil चांडिल बांध विस्थापित पंचायतों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने एवं पुनर्वास प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर जांच की मांग Demand for investigation into the issuance of fake birth certificates and irregularities in the rehabilitation process in Chandil Dam displaced panchayats

 


Upgrade Jharkhand News. चांडिल बांध विस्थापित प्रभावित क्षेत्रों में जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया में भारी अनियमितता, फर्जीवाड़ा एवं पुनर्वास प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने अनुमंडल कार्यालय चांडिल में अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। राकेश रंजन महतो ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से 2024 के बीच चांडिल बांध प्रभावित विभिन्न पंचायतों में बड़े पैमाने पर गलत तथ्यों एवं उम्र में हेराफेरी कर जन्म प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं। कई मामलों में कम उम्र के व्यक्तियों को अधिक उम्र दर्शाते हुए प्रमाण पत्र जारी किए जाने की शिकायत सामने आई है।


उन्होंने कहा कि शिकायतों के अनुसार एक असली जन्म प्रमाण पत्र को कंप्यूटर के माध्यम से एडिट कर कई अलग-अलग प्रमाण पत्र तैयार किए गए तथा उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया में उपयोग कर विकास पुस्तिका बनवाई गई। इसके साथ ही ऑफलाइन जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्रों में भी भारी गड़बड़ी एवं दस्तावेजी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे मुआवजा, पुनर्वास एवं अन्य सरकारी लाभों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी एवं फर्जीवाड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विस्थापित दलालों एवं बिचौलियों द्वारा प्रभावित परिवारों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई तथा कई लोगों पर लगातार दबाव बनाकर आर्थिक शोषण किए जाने की शिकायत भी प्राप्त हुई है।


यह मामला विशेष रूप से ओड़िया पंचायत, ईचाडीह पंचायत, जानूम पंचायत, लेटेमदा पंचायत, हेवेन पंचायत, गुंडा पंचायत, मैसाढ़ा पंचायत, पातकुम पंचायत, गौरांगकोचा पंचायत, बांदु (उदल) पंचायत, तमारी पंचायत, रसुनिया पंचायत एवं घोड़ानेगी पंचायत से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ज्ञापन में सभी संदिग्ध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जन्म प्रमाण पत्रों, डिजिटल अभिलेखों, IP Address, डिजिटल सिग्नेचर उपयोग, कंप्यूटर लॉगिन रिकॉर्ड एवं पुनर्वास कार्यालय में जमा दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही दोषी पदाधिकारियों, कर्मियों, दलालों एवं बिचौलियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।


इस संबंध में राकेश रंजन महतो ने कहा अगर अनुमंडल स्तरीय कार्रवाई नहीं होती है तो मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, जल संसाधन मंत्री झारखंड सरकार, मुख्य सचिव झारखंड सरकार, मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग ,उपायुक्त सरायकेला-खरसावां जिला, प्रशासक स्वर्णरेखा बहुउद्देशिय परियोजना,एन. एच.आर.सी सहित विभिन्न विभागीय अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करेंगे। अगर आवश्यकता हो धरना प्रदर्शन अथवा आमरण अनशन के लिए भी तैयार है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो चांडिल बांध विस्थापित क्षेत्र में पुनर्वास एवं मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े कई बड़े फर्जीवाड़ों का खुलासा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से वास्तविक विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।



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