Jamshedpur (Nagendra) झारखंड सरकार के द्वारा अधिसूचित पेशा नियमवाली को सही ढंग से लागू नहीं करने के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता रायमूल बांद्रा और अरविंद कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है । अदालत ने प्रार्थी याचिकाकर्ता के द्वारा उठाए गए सवालों के संबंध में सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा है ।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने बिंदुवार स्पष्टीकरण देने का दिया निर्देश - मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को बिंदुवार जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है , जिसमें याचिकाकर्ता रायमूल बांदरा और अरविंद कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली में मूल भावना के विपरीत संशोधन एवं प्रावधान लागू किए हैं, जिसके कारण आदिवासी एवं मूलवासी समुदायों को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को प्राप्त अधिकारों को व्यवहारिक रूप से कमजोर कर दिया गया है।
साथ ही कहा गया है कि सरकार ने नियमावली को अपने नियंत्रण में रखने की मंशा से लागू किया है, जिससे स्थानीय समुदायों की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदु तथ्यात्मक रूप से सही हैं या नहीं तथा क्या नियमावली में संविधान के अनुरूप संशोधन किए गए हैं ? इस संबंध में अदालत ने अगली सुनवाई तक राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है । मामले की अगली सुनवाई जून माह के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस नियमावली को महज आई वॉश कर दिया गया है।


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