Jamshedpur (Nagendra) चांडिल वन क्षेत्र में एक बार फिर इंसानी लापरवाही का खामियाजा एक बेजुबान को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। कुकड़ू प्रखंड के तिरूलडीह और सापारूम गांव के बीच देर रात करंट लगने से एक जंगली नर हाथी की मौत हो गई। बुधवार सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए, तो उन्हें एक हाथी का शव मिला, जिसके शरीर में बिजली का तार लिपटा हुआ था। इससे स्पष्ट है कि हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। घटना की खबर मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर जुट गए। इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश के साथ-साथ गहरी चिंता भी देखी जा रही है।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद शव को घटनास्थल के पास ही दफनाने की तैयारी की जा रही है।
झुंड के अन्य हाथियों पर भी खतरा -ग्रामीणों के अनुसार, मृत हाथी एक झुंड का हिस्सा था। आशंका जताई जा रही है कि झुंड के अन्य हाथी भी करंट की चपेट में आ सकते हैं। वन विभाग इस दिशा में जांच कर रहा है। ग्रामीणों ने इस घटना के लिए लचर व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि गांव में कई जगह बिजली के तार काफी नीचे लटके हुए हैं, जिससे जंगल से गुजरने वाले हाथियों के लिए हमेशा खतरा बना रहता है। संभवतः इसी वजह से यह हादसा हुआ है ।
पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं -चांडिल और आसपास के वन क्षेत्रों में करंट से हाथियों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। जून 2025 में हेवन गांव में एक हाथी की करंट से मौत हुई थी। उसी महीने अमबेड़ा के पास खेत में एक और हाथी की जान गई । नवंबर 2023 में मुसाबनी वन क्षेत्र में एक साथ 5 हाथियों की मौत हुई थी। चाकुलिया क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 2 हाथियों की मौत हुई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस बार क्या कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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