Jamshedpur (Nagendra) पिडिलाइट इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने अपने लोकप्रिय ब्रांड फेविकोल के लिए नया टेलीविजन कमर्शियल ‘कुर्सी पे नजर’ लॉन्च किया है। यह विज्ञापन भारतीय सामाजिक सोच और रोजमर्रा की जिंदगी से प्रेरित एक गहरी अवधारणा को दर्शाता है। इसमें एक साधारण कुर्सी को सिर्फ फर्नीचर नहीं, बल्कि घरों, दफ्तरों और संस्थानों में उम्मीद, अधिकार और महत्वाकांक्षा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस मौके पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधांशु वत्स ने कहा कि फेविकोल हमेशा से मानवीय जीवन की सरल सच्चाइयों को दिल छू लेने वाले अंदाज में प्रस्तुत करता रहा है। यह नया विज्ञापन भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। विज्ञापन के निर्देशक प्रसून पांडे ने इसे अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्म बताया और कहा कि यह दिवंगत विज्ञापन विशेषज्ञ पीयूष पांडे के अनोखे विचार पर आधारित है।
ओगिल्वी इंडिया के क्रिएटिव लीडर्स कैनाज करमाकर और हर्षद राज्याध्यक्ष ने भी इसे एक खास और भावनात्मक प्रस्तुति बताया, जो फेविकोल की विरासत को मजबूत करता है। फेविकोल की खास हाजिर जवाबी और अपनापन लिए हुए, ‘कुर्सी पे नजर’ भारतीय समाज में गहराई से बसी एक सच्चाई को दिखाती है। इस समाज में, कुर्सी पर कौन बैठता है, कौन उसका इंतजार करता है, और अगली बार कौन उस पर नजर गड़ाए बैठा है, ये सभी बातें अक्सर लोगों की महत्वाकांक्षा, असर और तरक्की के बदलते समीकरणों को दिखाती हैं। यह फिल्म इस रोजमर्रा की बात को एक यादगार कहानी में बदल देती है, और फेविकोल की इस काबिलियत को और मजबूत करती है कि वह आम पलों में भी बेहतरीन कहानियां ढूंढ़ लेता है।

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