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Chaibasa रोजो पर्व में ओड़िआ संस्कृति और परंपरा का दिखा अनोखा संगम Rojo festival showcases a unique confluence of Odia culture and tradition.

 


Guwa (Sandeep Gupta) गुवा एवं आसपास के क्षेत्रों में ओड़िआ समाज का पारंपरिक लोकपर्व रोजो पूरे उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के पहले दिन अहले सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं, युवतियों और बच्चों ने नए परिधान धारण कर पूजा-अर्चना की तथा घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व के अवसर पर छोटी बच्चियां और कुंवारी कन्याएं हाथों में मेहंदी रचाकर पारंपरिक झूलों का आनंद लेती नजर आईं। गांवों और बस्तियों में जगह-जगह झूले लगाए गए, जहां युवतियों ने लोकगीत बनस्ते डाकिला गजो, बरषके थरे आसिछी रोजो गाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। पूरे क्षेत्र में ओड़िआ संस्कृति और परंपरा की अनूठी छटा देखने को मिली। 


रोजो पर्व के दौरान घरों में चावल के आटे से बने विभिन्न पारंपरिक व्यंजन और पकवान तैयार किए गए। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर इस लोकपर्व का आनंद लेते दिखे। यह चार दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जिसमें पहले दिन पहिली रोजो, दूसरे दिन रोजो संक्रांति (मिथुन संक्रांति), तीसरे दिन बासी रोजो और चौथे दिन बसुमती स्नान के साथ पर्व का समापन होता है। लोकमान्यता के अनुसार, रोजो पर्व वर्षा ऋतु के आगमन का संदेश देता है और धरती माता तथा नारीत्व के सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि ओड़िआ समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरता है।



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