Jamshedpur (Nagendra) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (MoE) के निर्देशों के अनुरूप, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में पाँच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र मार्गदर्शन (Student Mentoring), मनोसामाजिक कल्याण (Psychosocial Well-being), परामर्श सहायता प्रणाली (Counselling Support Systems), परिणाम-आधारित शिक्षण (Outcome-Oriented Pedagogy) तथा समावेशी शैक्षणिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाना है। यह कार्यक्रम संस्थान के माननीय निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के दूरदर्शी एवं गतिशील नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। 26 मई 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र के उपरांत कार्यक्रम का दूसरा दिवस 4 जून 2026 (गुरुवार) को प्रातः 10:00 बजे से डीजेएलएचसी कक्ष संख्या-212 में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल वर्कशॉप के तहत दो विशेषज्ञ व्याख्यान सत्र आयोजित किए गए।
प्रथम तकनीकी सत्र प्रातः 10:00 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित किया गया, जिसका विषय था “छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली दृश्य एवं अदृश्य बाधाओं की पहचान”। यह सत्र श्री विष्णु सुरेश, साइकियाट्रिक सोशल वर्क ट्यूटर, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP), रांची द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया एवं शैक्षणिक निरंतरता को प्रभावित करने वाली शैक्षणिक, व्यवहारिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक-पर्यावरणीय चुनौतियों पर बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों में आने वाली समस्याओं की प्रारंभिक पहचान, मनोसामाजिक हस्तक्षेप रणनीतियों तथा साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शन पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की, जो छात्रों में मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं समग्र विकास को प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित एवं समावेशी शिक्षण वातावरण निर्माण में फैकल्टी मेंटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया। द्वितीय सत्र प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित किया गया, जिसका विषय था “आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) एवं सक्रिय शिक्षण पद्धति (Active Pedagogy)”। यह सत्र सुश्री एन. टी. रूपा, साइकियाट्रिक प्रोफेशनल, कोलकाता द्वारा संचालित किया गया।
अपने व्याख्यान में उन्होंने परिणाम-आधारित शिक्षा (OBE) की अवधारणाओं को शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के साथ एकीकृत करने पर बल दिया, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक सहभागिता तथा मापनीय अधिगम परिणामों को सुदृढ़ बनाया जा सके। सत्र में पाठ्यक्रम परिणामों के रचनात्मक संरेखण (Constructive Alignment), दक्षता मानचित्रण (Competency Mapping), सक्रिय अधिगम तकनीकों, सहयोगात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम मॉडल, प्रारूपिक मूल्यांकन रणनीतियों तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में सतत गुणवत्ता सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता तथा सहभागितापूर्ण कक्षा वातावरण विकसित करने हेतु नवाचारपूर्ण शिक्षण हस्तक्षेपों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों सत्र अत्यंत संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक रहे तथा प्रतिभागियों को समकालीन छात्र मार्गदर्शन पद्धतियों, छात्र सहायता प्रणालियों एवं उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी शिक्षण-अधिगम रणनीतियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. सरोज कुमार सारंगी, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) एवं कुलसचिव (प्रभारी), तथा प्रो. दिलीप कुमार यादव, अधिष्ठाता (संकाय कल्याण) की अध्यक्षता में किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुमारी नम्रता एवं डॉ. एस. सक्थिवेल रहे। कार्यक्रम के समन्वयकों में डॉ. विजय कुमार डल्ला, डॉ. कुणाल सिंह, डॉ. संगीता कुमारी एवं डॉ. पौलामी माजी शामिल थे, जबकि अजिताभ गौतम एवं श्रीमती पुष्पा बाला महतो ने सह-समन्वयक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों के अतिरिक्त उप-निदेशक प्रो. आर. वी. शर्मा, सभी अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने सत्रों में सक्रिय सहभागिता निभाई । इस मौके पर संसाधन व्यक्तियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम ने शिक्षा मंत्रालय की परिकल्पना एवं उच्च शिक्षा में समग्र छात्र विकास तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप छात्र-केंद्रित, समावेशी एवं अकादमिक रूप से उत्तरदायी संस्थागत वातावरण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


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