Jamshedpur (Nagendra) भारत के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक, मणिपाल हॉस्पिटल्स समूह की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल्स ढाकुरिया ने बुधवार को जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित एक होटल में सीपीआर प्रशिक्षण एवं जागरूकता सत्र का आयोजन किया । इस पहल का उद्देश्य आपातकालीन हृदय देखभाल, समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और जीवनरक्षक कौशलों के महत्व के प्रति जागरुकता बढ़ाना था। इस सत्र में मणिपाल हॉस्पिटल्स ढाकुरिया के प्रमुख विशेषज्ञों में डॉ. कौशिक मुखर्जी, सीनियर कंसल्टेंट - कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, तथा डॉ. सुमंत चटर्जी, सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी ने भाग लिया। उन्होंने हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों के बढ़ते बोझ, हृदय संबंधी आपात स्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका और सीपीआर के माध्यम से जीवित रहने की संभावनाओं में होने वाले सुधार पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
जागरूकता सत्र में जमशेदपुर के उन मरीजों के प्रेरणादायक अनुभव भी साझा किए गए, जिन्होंने मणिपाल हॉस्पिटल्स ढाकुरिया में हृदय उपचार प्राप्त किया था। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य यात्रा और समय पर मिले उपचार के सकारात्मक प्रभाव के बारे में भी बताया। भारत में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (सीवीडी) एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं और देश में होने वाली कुल मौतों के लगभग एक-तिहाई के लिए जिम्मेदार हैं। वर्ष २०२१ में अनुमानित २.८७ मिलियन हृदय संबंधी मौतें दर्ज की गई। हृदय रोगों के बढ़ते प्रभाव ने जागरुकता, रोकथाम और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, तंबाकू सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव जैसे जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों ने हृदय रोगों के प्रसार को और बढ़ाया है, जिससे युवा आबादी भी तेजी से प्रभावित हो रही है। इस विषय पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने प्रारंभिक पहचान, नियमित स्वास्थ्य निगरानी और हृदय चिकित्सा में हो रही प्रगति के महत्व पर प्रकाश डाला, जो मरीजों के उपचार परिणामों को बेहतर बना रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि हृदय संबंधी आपात स्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि समय पर हस्तक्षेप और जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी मरीज के जीवित रहने की संभावना को काफी बढ़ा सकती है। सत्र का समापन व्यावहारिक सीपीआर प्रशिक्षण के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने वाली आवश्यक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। सत्र के दौरान उपस्थित लोगों ने मरीज काशी नाथ सिंह का अनुभव भी सुना, जिन्होंने हाल ही में मणिपाल हॉस्पिटल्स दाकुरिया में सफल कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) सर्जरी कराई थी। अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, "मैं डॉ. कौशिक मुखर्जी और मणिपाल हॉस्पिटल्स ढाकुरिया की पूरी टीम के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूँ। मेरी सीएबीजी सर्जरी के दौरान उन्होंने जो उत्कृष्ट देखभाल और विशेषज्ञता दिखाई, वह मेरी रिकवरी में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनकी दक्षता, समर्पण और संवेदनशीलता ने न केवल मुझे बल्कि मेरे परिवार को भी कठिन समय में बहुत भरोसा और संबल दिया। मरीजों के कल्याण के प्रति अस्पताल की प्रतिबद्धता ने वास्तव में मुझे जीवन का एक नया अवसर प्रदान किया है।"
निवारक हृदय देखभाल और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप के महत्व पर बोलते हुए डॉ. सुमंत चटर्जी ने कहा, "भारत में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं, जिनके पीछे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, ध्रूमपान, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली जैसे जोखिम कारक जिम्मेदार हैं। अच्छी बात यह है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, शीघ्र निदान और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप के माध्यम से हृदय संबंधी कई जटिलताओं को रोका या प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव प्रबंधन और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण जैसी हृदय-हितैषी आदतें गंभीर हृदय घटनाओं के जोखिम को काफी कम कर सकती हैं। मणिपाल हॉस्पिटल्स में हम लोगों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और किसी भी शुरुआती लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, ताकि बेहतर दीर्घकालिक परिणाम सुनिश्चित किए जा सके।"
सीपीआर प्रशिक्षण और चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान जनसामान्य की तैयारी के महत्व पर बोलते हुए डॉ. कौशिक मुखर्जी ने कहा, "हृदय संबंधी आपात स्थिति के दौरान हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। लक्षणों की तुरंत पहचान और आसपास मौजूद लोगों द्वारा समय पर प्रतिक्रिया, उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध होने से पहले जीवन और मृत्यु के बीच अंतर साबित हो सकती है। सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट जैसे सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी जीवनरक्षक कौशल अचानक हृदयाघात और अन्य चिकित्सा आपात स्थितियों में मरीज के जीवित रहने की संभावना को काफी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, आम लोगों के बीच इन तकनीकों को अपनाने और लागू करने को लेकर जागरूकता एवं आत्मविश्वास अभी भी सीमित है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हमारा उद्देश्य लोगों को आवश्यक जान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है, ताकि वे आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें और एक अधिक सुरक्षित एवं तैयार समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।"
ऐसी पहलों के माध्यम से मणिपाल हॉस्पिटल्स स्वास्थ्य जागरुकता को मजबूत करने, समय पर चिकित्सकीय मार्गदर्शन तक पहुंच बढ़ाने तथा पूर्वोत्तर भारत के समुदायों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, आपातकालीन तैयारी, शीघ्र निदान और उन्नत उपचार विकल्पों के बारे में जागरुक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


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