Upgrade Jharkhand News. क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में 19 जुलाई 2026 को भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का निर्णायक मुकाबला खेला गया। नतीजा इंग्लैंड के पक्ष में रहा। मेजबान टीम ने 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर भारत को 360 रन पर रोककर 27 रन से जीत दर्ज की। इसके साथ ही तीन मैचों की सीरीज भी इंग्लैंड ने 2-1 से अपने नाम कर ली। स्कोरबोर्ड पर हार दर्ज हुई, लेकिन इस हार के बीच भी भारतीय क्रिकेट को एक बड़ी राहत मिली और वो राहत थी रोहित शर्मा और विराट कोहली की बल्लेबाजी। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। बेन डकेट ने 141 रन की शानदार पारी खेली। जेकब बेथेल ने 91 रन जोड़े और जो रूट अंत तक नाबाद 74 रन पर खड़े रहे। भारतीय गेंदबाजी बुमराह के बिना बिखरी हुई नजर आई। प्रसिद्ध कृष्णा को छोड़कर कोई भी गेंदबाज नियमित विकेट नहीं ले सका और इंग्लैंड ने निर्धारित 50 ओवर में 387 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया। किसी भी टीम के लिए इस लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं था, खासकर लॉर्ड्स जैसी पिच पर जहां दूसरी पारी में गेंद थोड़ी रुककर आती है।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत शानदार रही। कप्तान रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 147 रन जोड़े। गिल 77 रन बनाकर आउट हुए तो क्रीज पर आए विराट कोहली और फिर जो अगले 15 ओवर हुए उसने देखने वालों को अपनी जगह पर जैसे बांध सा दिया। रोहित एक छोर पर क्लास दिखा रहे थे तो दूसरे छोर पर विराट एग्रेसन। रोहित ने पावरप्ले में संभलकर खेला और फिर 20वें ओवर के बाद अपना असली रूप दिखाया। पुल शॉट, कवर ड्राइव और लॉफ्टेड छक्के। उन्होंने 110 गेंदों में 138 रन बनाए। ये उनका 34वां वनडे शतक था और इंग्लैंड की धरती पर 8वां। दूसरी तरफ विराट कोहली भी अपने रंग में थे। 60 गेंदों में 74 रन। स्ट्राइक रेट 123 का। रोहित के साथ मिलकर उन्होंने शतकीय साझेदारी की और 30 ओवर तक भारत का स्कोर 220 पर एक विकेट था। उस समय लग रहा था कि 388 रन का लक्ष्य भी भारत के लिए मुश्किल नहीं है। पूरे देश में यही चर्चा थी कि जब रोहित और विराट क्रीज पर हों तो कोई भी स्कोर छोटा पड़ जाता है। लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। पहले रोहित आउट हुए और फिर ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के बाद पारी संभालने की कोशिश करते हुए विराट ने आक्रामक खेल खेला और सैम करन को अपना विकेट दे बैठे। रोहित और विराट दोनों के जाने के बाद भारतीय मध्यक्रम बिखर गया और टीम 360 रन ही बना सकी।
इस हार के बावजूद लार्ड्स का मैच भारतीय क्रिकेट के लिए कई मायनों में जरूरी था। सबसे पहली बात ये कि इस मैच ने दिखाया कि बड़े लक्ष्य का पीछा करने का माद्दा अभी भी इस टीम में है। 387 रन का स्कोर किसी भी टीम को दबाव में ला देता है। नई टीमें 300 रन पर ही घुटने टेक देती हैं। लेकिन रोहित और विराट ने 35 ओवर तक भारत को पूरी तरह मैच में बनाए रखा। उन्होंने साबित किया कि अनुभव क्या होता है। दबाव में रन रेट को कैसे मेंटेन रखा जाता है और टीम को कैसे विश्वास दिलाया जाता है कि मैच अभी खत्म नहीं हुआ है। अंत में भले ही हम 27 रन से हार गए लेकिन लड़ाई आखिरी ओवर तक चली और इस लड़ाई का चेहरा सिर्फ ये दो खिलाड़ी थे। दूसरी जरूरी बात ये थी कि ये दोनों वरिष्ठ खिलाड़ी भारत की युवा टीम के लिए ढाल बने हुए हैं। इस पूरी सीरीज में शुभमन गिल, तिलक वर्मा और अर्शदीप जैसे युवा खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जब 388 रन का पहाड़ सामने था तो ड्रेसिंग रूम में सबसे शांत चेहरे रोहित और विराट के थे। जब ये दोनों क्रीज पर होते हैं तो बाकी बल्लेबाजों पर दबाव आधा हो जाता है। गिल ने मैच के बाद कहा भी कि रोहित भाई के साथ ओपनिंग करना मतलब आधी टेंशन खत्म हो जाना। यही मेंटॉरशिप है जो अगले दो साल में 2027 के वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करेगी। विराट ने फिटनेस का कल्चर दिया और रोहित ने निडर क्रिकेट का। ये विरासत आने वाली पीढ़ी को मिल रही है।
तीसरी और सबसे बड़ी बात फैंस से जुड़ी है। भारत मैच हार गया, सीरीज भी हार गया। लेकिन मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड क्या कर रहा था। रोहित 138 और कोहली 74, लोग हार से ज्यादा इस बात से खुश थे कि उनके हीरो अभी भी बड़े मंच पर परफॉर्म कर सकते हैं। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप और 2024 के टी20 वर्ल्ड कप की यादें ताजा हो गईं। फैंस को पता है कि जब तक ये दोनों टीम में हैं तब तक कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। यही भरोसा भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत है।बेशक इस मैच ने कुछ चिंताएं भी बढ़ाई हैं। बुमराह के बिना गेंदबाजी पूरी तरह बेअसर नजर आई। 387 रन बन गए और हम डिफेंड नहीं कर पाए। मध्यक्रम की निर्भरता भी पूरी तरह रोहित और विराट पर है। जैसे ही ये दोनों आउट हुए पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। आखिरी 10 ओवर में 120 रन चाहिए थे और हम सिर्फ 93 ही बना सके। फिनिशर की कमी साफ दिखी। लॉर्ड्स हमेशा से भारतीय क्रिकेट की परीक्षा रहा है। 1983 का वर्ल्ड कप फाइनल हो या 2002 का नैटवेस्ट फाइनल या फिर 2021 में 151 रन से मिली जीत। इस मैदान की अपनी एक विरासत है। 2026 में इस मैदान ने एक नई कहानी लिखी। कहानी अनुभव की, जज्बे की और आखिरी लड़ाई की। रोहित 39 के हैं और विराट 37 के। दोनों ने इशारा कर दिया है कि 2027 का वनडे वर्ल्ड कप उनका आखिरी टूर्नामेंट होगा। लार्डस् में उन्होंने फिर वही किया जो वो पिछले 15 साल से करते आए हैं। जिम्मेदारी ली, टीम को अपने कंधों पर उठाया और हार में भी सम्मान दिलाया।
भारतीय क्रिकेट के लिए इस हार के बाद भी सबसे बड़ी बात ये रही कि रोहित शर्मा और विराट कोहली अभी खत्म नहीं हुए हैं। जब तक ये दोनों क्रीज पर हैं तब तक भारत कोई भी मैच जीत सकता है। जब तक ये ड्रेसिंग रूम में हैं तब तक युवाओं को एक रास्ता मिलता रहेगा। टीम को नए गेंदबाज और नए फिनिशर की जरूरत है इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन रीढ़ के रूप में अभी अगले दो साल तक भारतीय क्रिकेट को रोहित और विराट की जरूरत है। लॉर्ड्स में भारत हारा जरूर लेकिन रोहित और विराट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट की धड़कन आज भी उन्हीं के बल्ले से चलती है। अंजनी सक्सेना

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