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Bhopal व्यंग्य : खुशी हो या गम सेल्फी हो हरदम Satire: Whether it's happiness or sadness, selfies are always there.

 


Upgrade Jharkhand News.  एक समय था, जब पासपोर्ट साइज का फोटो खिंचवाने के लिए फोटो स्टूडियो के चक्कर लगाने पड़ते थे। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार फोटो खिंचवाने का मुहूर्त निकालना पड़ता था। उसके उपरांत नहा धोकर अच्छे से कपड़े पहन कर फोटो खिंचवाने की कवायद की जाती थी। उस समय फटाफट फोटो प्राप्त करने का चलन नहीं था। यदि कहीं फटाफट फोटो की आवश्यकता होती थी, तो काले कपड़े से ढके लकड़ी के खांचे वाला कैमरा प्रयोग में लाया जाता था, अन्यथा फोटो ग्राफर रील पूरी होने की संभावना का अनुमान लगाकर फोटो बनाकर देने की तिथि एक रसीद पर लिखकर देता था। बहरहाल जहाँ चाह वहीं राह। समय के साथ फोटोग्राफी की तकनीक भी बदल गई। कैमरे भी अद्यतन हो गए। पहले कैमरे केवल फोटो खींचने तक ही सीमित थे, अब मोबाइल में कैमरे फिट होकर एक पंथ अनेक काज करने लगे। फोटो खींचने से लेकर रील बनाने तक, रील बनाने से लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने तक अनेक भूमिकाएं मोबाइल फोन निभाने लगे।

 

भले ही हर हाथ को रोजगार न मिला हो, मगर अधिकतर हाथों में एंड्रॉयड फोन अवश्य आ गए। बदलते युग में हर कोई सेलिब्रिटी बनने की राह पर है। फोटो शूट के लिए हर किसी को सेल्फी पॉइंट की तलाश रहती है, जहाँ वह अपनी फोटो अपने आप ही खींच सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र में चर्चित रहने के लिए सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर चेपने का चलन इतना बढ़ गया है, कि हर कोई प्रत्येक अवसर पर अपने लिए सेल्फी पॉइंट ढूँढ ही लेता है। मसलन कुछ लोग किसी सेलिब्रिटी के पास खड़े होकर सेल्फी लेने लगते हैं, कुछ पारिवारिक उत्सवों में सेल्फी ले लेकर अपने मोबाइल की फोटो गैलरी में अल्बम बनाने से नहीं चूकते तथा उपयुक्त समय पर उस सेल्फी का प्रयोग सोशल मीडिया पर करने लगते हैं। जिन्हें स्वयं सेल्फी लेनी नहीं आती, वे इस पुनीत कार्य के लिए किसी सहायक को साथ लेकर चलते हैं। पहले सेल्फी पॉइंट पर्वत, झरने, खाई आदि प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों तक ही सीमित थे। अब विवाह उत्सवों में बाकायदा अनेक सेल्फी पॉइंट तैयार किये जाने लगे हैं, जिन पर सेल्फी प्रेमियों का जमघट लगता ही है।


हद तो तब हो जाती है, जब किसी मृतक की शोक सभा में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले शोकाकुल सेल्फी प्रेमी मृतक की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करने की सेल्फी खींचकर उसे भी सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में देर नहीं लगाते। लगता है, कि पहले के मुकाबले लोग अधिक व्यवहारिक हो गए हैं, जो ख़ुशी हो या गम हर स्थिति में सेल्फी सेल्फी खेलकर प्रसन्न रहने का संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करने में विलम्ब नहीं करते। सुधाकर आशावादी 



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