Default Image

Months format

Show More Text

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

Terhubung

NewsLite - Magazine & News Blogger Template
NewsLite - Magazine & News Blogger Template

Chandil एसएम स्टील परियोजना को लेकर विवाद बरकरार। ठीकेदारी विवाद का समझौता, फिर भी ग्रामीणों का विरोध तेज The controversy surrounding the SM Steel project continues. A settlement has been reached regarding the contract dispute, yet villagers continue to protest.

 


Upgrade Jharkhand News.  सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र के आदरडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, नीमडीह, केतूंगा सहित आसपास के मौजा में प्रस्तावित एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड परियोजना शुरू से ही विवादों के घेरे में है। दो दिन पहले कंपनी में ठीकेदारी को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद का पटाक्षेप तो रविवार 12 जुलाई 2026 को नीमडीह थाना में आपसी समझौते के साथ हो गया, लेकिन जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर ग्रामीणों का आक्रोश थमने के बजाय और तेज हो गया है।


धरना देकर जताया विरोध -सोमवार को ग्रामीणों का एक पक्ष कंपनी गेट के पास धरने पर बैठ गया। ग्रामीणों का आरोप था कि बिना उनकी सहमति के जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। बाद में कंपनी प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद धरना वापस ले लिया गया। लेकिन इस बीच ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।


6 महीने पहले ग्रामसभा में भी हुआ था भारी विरोध -इससे 6 महीने पूर्व नीमडीह प्रखंड के गौरडीह पंचायत भवन में आयोजित ग्रामसभा में भी माहौल पूरी तरह विरोध के रंग में रंगा था। सभा की अध्यक्षता मदन मोहन सिंह ने की। सभा शुरू होते ही उन्होंने कहा, "हम अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे।" इसके बाद पूरे पंचायत भवन में विरोध के स्वर गूंज उठे। सभा में नीमडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, केतूंगा और सुंडीदीह मौजा के ग्रामीणों ने एक स्वर में घोषणा की कि वे प्रस्तावित एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड की स्थापना किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।


जमीन अधिग्रहण पर उठे गंभीर आरोप-ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया विवादों से घिरी हुई है। उनका दावा है कि 95 प्रतिशत से अधिक जमीन मालिकों ने अपनी सहमति नहीं दी है, फिर भी कागजों में सहमति दिखाकर जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि दलालों ने 44 हजार रुपये प्रति डिसमिल की दर वाली जमीन को मात्र 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल दिखाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है। कई किसानों को अब तक मुआवजा भी नहीं मिला है।सभा के दौरान गौरडीह की एक वृद्ध महिला ने भावुक होकर कहा कि उन्हें बताया गया था कि जमीन का मूल्य केवल 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल मिलेगा और बाकी का लाभ नौकरी के रूप में दिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया, "जब सरकार टैक्स लेती है तो बीच में दलालों की भूमिका क्यों है?"


जनसुनवाई और जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल -ग्रामीणों ने प्रस्तावित 11 नवंबर को होने वाली आम जनसुनवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह "जनता की नहीं बल्कि कंपनी की सुनवाई" होगी। उन्होंने घोषणा की कि उस दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, ईचागढ़ विधायक सविता महतो और मंत्री दीपक बिरुआ के पुतले जलाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि जनता की बजाय कंपनी के पक्ष में खड़े हैं।सभा में राधाकृष्ण सिंह मुंडा ने कहा कि उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। यदि प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं हुई तो उपायुक्त के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।


"जमीन हमारी पहचान और अस्मिता" -सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से गहरा विवाद बना हुआ है। ग्रामसभा समाप्त होने के बाद भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पंचायत भवन परिसर में मौजूद रहे। लोगों का कहना था कि उनके लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पहचान और अस्मिता है। ग्रामीणों ने एक बार फिर दोहराया कि उनका संघर्ष केवल एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए लगता है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह विरोध बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।



No comments:

Post a Comment

GET THE FASTEST NEWS AROUND YOU

-ADVERTISEMENT-

.