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Jamshedpur नई पीढ़ी पर शक नहीं, भरोसा कीजिए : सरयू राय Don't doubt the new generation, trust them: Saryu Rai

 


  • टेक्नोलॉजी को मालिक बनाया तो तबाही, सेवक बनाया तो कल्याण
  • छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ के समापन समारोह को किया संबोधित

Upgrade Jharkhand News. जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सोच के अंतर को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी पर शंका करने की नहीं, उस पर विश्वास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी बदलती परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के दौर में बड़ी हो रही है। इसलिए उसका सोचने और काम करने का तरीका पुरानी पीढ़ी से अलग होना स्वाभाविक है। पुरानी पीढ़ी को अपने अनुभवों के आधार पर नई पीढ़ी को आंकने के बजाय उसे आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।


सोनारी में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि पुरानी पीढ़ी अक्सर यह मान लेती है कि नई पीढ़ी उतना नहीं कर रही है या उतना नहीं कर पाएगी, जितना उसने किया है। उन्होंने कहा कि यह सोच ही गलत है। सरयू राय ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी बेटी इंदिरा गांधी को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पुरानी पीढ़ी अपने अनुभवों, मान्यताओं और पुराने तौर-तरीकों के आधार पर दुनिया को देखने की आदी होती है। वहीं नई पीढ़ी अलग समय और अलग परिस्थितियों में जन्म लेती है। इसलिए उसका सोचने का तरीका भी अलग होता है।


उन्होंने कहा कि केवल इसलिए नई पीढ़ी की सोच को गलत नहीं माना जा सकता कि वह पुरानी पीढ़ी की सोच से अलग है। समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं और उनके साथ सोच में बदलाव भी जरूरी है। पुरानी पीढ़ी का अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन वह नई पीढ़ी की स्वतंत्र सोच और नए प्रयोगों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर नई पीढ़ी पर होने वाली आलोचना पर भी सरयू राय ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज हर हाथ में स्मार्टफोन है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि युवा मोबाइल का इस्तेमाल करता है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि वह उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से करता है।


उन्होंने कहा कि अगर कोई नौजवान मोबाइल पर ज्ञान, शिक्षा, रोजगार या अपने काम से जुड़ी उपयोगी जानकारी हासिल करता है तो उसका कल्याण तय है। लेकिन अगर वह उल-जुलूल और अनावश्यक चीजों में समय बर्बाद करता है तो वही मोबाइल उसके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। सरयू राय ने कहा कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हमारे हाथ में है। “टेक्नोलॉजी को मालिक बनाइएगा तो बर्बाद हो जाइएगा। टेक्नोलॉजी को सेवक के रूप में रखेंगे तो कल्याण हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल व्यक्ति, समाज और देश के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने रामायण पाठ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कुछ लोग एक साथ बैठकर रामायण पाठ करते थे और जितने लोग वहां मौजूद होते थे, उतने ही लोग उसे सुन पाते थे। उस समय लाउडस्पीकर नहीं था। बाद में तकनीक के विकास के साथ लाउडस्पीकर आया तो आवाज दूर तक पहुंचने लगी और रामायण पाठ सुनने वालों की संख्या सैकड़ों-हजारों तक पहुंच गई।


आज मोबाइल और इंटरनेट ने इस पहुंच को और व्यापक कर दिया है। रामायण पाठ का सीधा प्रसारण दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि यही तकनीक का सकारात्मक इस्तेमाल है। सरयू राय ने कहा कि मोबाइल और तकनीक को दोष देने के बजाय उसके इस्तेमाल की दिशा पर ध्यान देने की जरूरत है। तकनीक को अपने ऊपर हावी करने के बजाय उसे अपने उद्देश्य की पूर्ति का साधन बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी के प्रति अविश्वास का भाव छोड़ना होगा। अनुभव और नई सोच का समन्वय ही समाज को आगे ले जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, “नई पीढ़ी पर भरोसा कीजिए। निश्चित जानिए कि नई पीढ़ी बढ़िया करेगी।”



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