LIVE TV
ब्रेकिंग न्यूज़

Ichagur चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच की संवाद यात्रा जारी Chandil Dam Displaced Coordination Forum's dialogue tour continues

  • चांडिल :दूसरे चरण के दूसरे दिन छोटा आमड़ा से लेपाटांड़ तक गांवों में पहुंचा मंच
  • 116 गांव और 13 पुनर्वास स्थलों के संवाद के बाद तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति

Upgrade Jharkhand News. 8 सितंबर 2026। चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले 116 विस्थापित गांवों एवं 13 पुनर्वास स्थलों में संवाद यात्रा के दूसरे चरण के दूसरे दिन ईचागढ़ प्रखंड के छोटा आमड़ा, बड़ा आमड़ा, हुटुप, नदीसाई, फिरगिवासा, कुंदरिलोंग, बनकाटी पुनर्वास स्थल तथा लेपाटांड़ तक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंच का यह संवाद अभियान 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 तक चलाया जा रहा है। यात्रा के दौरान विस्थापित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी वर्तमान समस्याओं, लंबित अधिकारों, पुनर्वास एवं मुआवजा संबंधी मामलों तथा वर्षों से चले आ रहे विस्थापन के दर्द को समझने और सामूहिक रूप से आगे की दिशा तय करने का प्रयास किया जा रहा है।


मंच के सदस्य राकेश रंजन महतो, श्यामल मार्डी एवं अंबिका यादव ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह संवाद यात्रा केवल गांव-गांव जाकर समस्याएं सुनने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विस्थापित समाज को एकजुट कर निर्णायक संघर्ष की जमीन तैयार करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि चांडिल डैम के विस्थापित आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकारें आती-जाती रहीं, घोषणाएं होती रहीं, लेकिन विस्थापितों की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान धरातल पर नहीं उतर सका। मंच ने कहा कि यदि वर्षों के संघर्ष के बाद विस्थापन आयोग की घोषणा की गई है, तो उसे केवल सरकारी घोषणा बनाकर रखने के बजाय तत्काल धरातल पर लागू करना होगा।


घोषणा नहीं, जमीन पर चाहिए विस्थापन आयोग -मंच ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विस्थापन आयोग की घोषणा के बावजूद यदि उसका गठन, अधिकार एवं कार्यप्रणाली जमीन पर दिखाई नहीं देती, तो ऐसी घोषणा विस्थापितों के साथ सिर्फ राजनीतिक छलावा बनकर रह जाएगी। मंच ने सरकार से मांग की कि विस्थापन आयोग को अविलंब प्रभावी रूप से धरातल पर उतारा जाए तथा उसे पर्याप्त अधिकार और संसाधन देकर विस्थापितों की लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।


संवाद यात्रा के बाद आंदोलन की निर्णायक रणनीति -मंच के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि 7 से 12 सितंबर तक 116 गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों की संवाद यात्रा पूरी होने के बाद सामूहिक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में गांवों से प्राप्त समस्याओं, सुझावों और जनभावनाओं के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब विस्थापितों को केवल आश्वासन नहीं चाहिए। विस्थापन की पीड़ा झेल रहे परिवार अपने अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक ले जाने के लिए तैयार हैं।


मंच ने कहा कि संवाद यात्रा का उद्देश्य किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि विस्थापित समाज की वास्तविक समस्याओं को एक मंच पर लाना, गांवों के बीच समन्वय मजबूत करना, अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना और सामूहिक संघर्ष की दिशा तय करना है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार विस्थापितों की समस्याओं और विस्थापन आयोग को लेकर गंभीर पहल नहीं करती है, तो संवाद यात्रा के बाद विस्थापित समाज की सामूहिक राय के आधार पर आंदोलन को और व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया जाएगा। इस संवाद यात्रा में अंबिका यादव, श्यामल मार्डी ,राकेश रंजन महतो, सागर महतो, अंजित किस्कू, मनोहर महतो, हरेकृष्ण महतो, अनिल मुर्मू रेंघू हेंब्रम आदि विस्थापित उपस्थित रहे



No comments:

Post a Comment