पद्मश्री बलबीर दत्त, व्यंग्य साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर डॉ अशोक प्रियदर्शी, झारखंड वन विभाग के चीफ कंजरवेटर ऑफिसर मनीष वंदन सिंह के साथ ही कवि राकेश कुमार, अनुज कुमार पाठक, रमेश सिंह, सुधाकर झा, परशुराम तिवारी, सुनीता झा आदि साहित्यकारों ने अपने- अपने विचार व्यक्त किए। 5 फरवरी को प्रातः कालीन काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।
जिसकी अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अरुण सज्जन ने की और काव्य गोष्ठी का संचालन कवि राकेश कुमार प्रदेश महामंत्री ने किया। काव्य गोष्ठी में सरिता कुमारी, वीणा कुमारी, रमेश सिंह, अनुज पाठक, मृगेंद्र प्रताप मिश्र ने काव्य पाठ कर अपनी-अपनी अनुभूतियों में और रचनाओं में प्रकृति और व्यंग्य को मुख्य केंद्र बनाया। पद्म श्री बलबीर दत्त ने सभी कवियों की कविताओं को दिल से सराहा और सभी की कविताओं को उच्च कोटि की श्रेणी में बताया।
वरिष्ठ कवि अशोक प्रियदर्शी ने फागुन गीत को सस्वर पाठ कर प्रकृति की महत्ता को केन्द्रित किया। वहीं राकेश कुमार ने अपनी कविता में "आंसू" कविता पढ़कर लोगों को मर्माहत कर दिया। मनीष वंदन सिंह ने अपने आलेख के माध्यम से साहित्य और प्रकृति के महत्व को बताया तथा प्रकृति के बगैर साहित्य को अधूरा कहा। अध्यक्षता कर रहे डॉ अरुण सज्जन ने सारे कवियों की रचनाओं पर अपनी गंभीर और सटीक टिप्पणी दी तो दूसरी ओर उन्होंने अपनी चर्चित कविता" मैं टूटा नहीं हूं" का पाठ कर लोगों को गंभीर बना दिया। इस काव्य गोष्ठी में दलमा अभयारण्य के सौंदर्य को सभी ने साहित्य और प्रकृति को अपने अंदर महसूस किया। जिसमें लगभग 15 साहित्यकारों ने शिरकत किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन कवि गोष्ठी के संयोजक सुधाकर झा ने किया।

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