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स्वामी विवेकानंद जी को विदेश में मार देने की चेस्टा हुई थी लेकिन रामकृष्ण देव ने बचाया था : सुनील कुमार दे, There was an attempt to kill Swami Vivekananda abroad but Ramakrishna Dev saved him: Sunil Kumar De


पोटका। अमेरिका का चार सौ वर्ष की पूर्ति के उपलक्ष्य में विश्व धर्म महा सभा का आयोजन किया गया था। अमेरिका के शिकागो शहर में।सनातन हिन्दू धर्म को छोड़कर दुनिया के सभी धर्म के लोगों को बुलाया गया था।हिन्दू धर्म को लोग पौत्रलिक मानते थे।भगवान रामकृष्ण परमहंस देव जी के निर्देश अनुसार तथा राजा अजित सिंह और भक्तजनो के सहयोग से स्वामी विवेकानंद अमेरिका गए थे हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि बनकर बिना निमंत्रण में।वहां जाकर स्वामी विवेकानंद को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन रामकृष्ण देव की कृपा से अंत में धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म के बारे में बोलने के लिए दो मिनट समय मिला था।

उस समय ईसाई धर्म पूरे विश्व मे हावी था।वे लोग धर्म महासभा में ईसाई धर्म को श्रेष्ठ धर्म बनाना चाहते थे, लेकिन विवेकानंद जी का छोटा सा भाषण पाशा पलट दिया।जब उन्होंने,,Sisters and Brothers of America,,अर्थात अमेरिका के बहनों और भाइयो कहते हुए संबोधित किया तब कालंबस हॉल में बैठे हुए करीब दस हज़ार लोगो की तालियो से हॉल गूंज उठी।तीन मिनट तक तालियां बजते रही।स्वामीजी अपने भाषण में कहा,, दुनिया में कोई धर्म छोटा और बड़ा नहीं है।सभी धर्म सत्य है।विभिन्न मार्ग से हर धर्म के लोग भगवान के पास जा सकते हैं।स्वामीजी का भाषण ने तूफान खड़ा कर दिया।

1893 के 11 सितंबर से लेकर 27 सितम्बर तक धर्म महासभा चली।पूरे सम्मेलन में स्वामीजी छाए रहे।हिन्दू धर्म और भारत का डंका बजा।सनातन धर्म को लोग श्रेष्ठ धर्म के रूप में मानने लगे।धर्म महा सभा का समापन के बाद भी स्वामीजी का भाषण शुनने के लिए जगह जगह से बुलावा आने लगा।स्वामीजी पूरे अमेरिका और इंग्लैंड में घूम घूम कर हिन्दू धर्म का प्रचार करने लगा।हर जगह दुष्ट लोगों की कमी नहीं है।कुछ लोगों ने सोचा,,अमेरिका में विवेकानंद जी एकेले है।यह अगर ज्यादादिन यहाँ रह जायेंगे तो हमारा ईसाई धर्म खतरे में पड़ जायेगा।इसको मार दिया जाय।कैसे होगा।तब कुछ ईसाई लोग स्वामीजी को भाषण देने के लिए एक प्रोग्राम में बुलाया।

स्वामीजी गए।भाषण हुआ।भाषण के बाद चाय पानी की व्यवस्था की गई।स्वामीजी की चाय में जहर दी गई।स्वामीजी जब चाय पीने जा रहे थे तो उस समय चाय के कप में रामकृष्ण का आविर्भाव हुआ।ठाकुर जी हंसते हुए कहा,,नरेन,चाय मत पीओ।इसमें जहर मिला हुआ है।स्वामीजी चाय नहीं पिये।तब लोगों ने चाय नहीं पीने का कारण पूछा।स्वामीजी चाय में जहर देने की बात कहीं।तब लोगो ने माना विवेकानंद साधारण संन्यासी नहीं है, यह कोई देवदूत है।अंत में सारे लोग स्वामीजी से माफी मांगे और कालांतर में सभी लोग स्वामीजी के भक्त बन गए।

जिसके साथ सर्वदा भगवान है उसको कौन मार सकता है।

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